नई दिल्ली, । इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र एवं माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पत्रकारिता, शिक्षा और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पत्रकारिता के मूल में मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार और राष्ट्रहित होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक लाभ। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा केवल समाचारों के प्रकाशन की कहानी नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक चेतना, जनजागरण और राष्ट्र निर्माण की गौरवगाथा है। उन्होंने कहा कि हम इस कार्यक्रम के माध्यम से पत्रकारिता की उस चेतना के साक्षी बन रहे हैं, जिसने समाज को दिशा देने का कार्य किया है। सिंधिया ने कहा कि ‘उदन्त मार्तण्ड’ केवल एक समाचार पत्र नहीं था, बल्कि वह सामाजिक चेतना का वाहक था। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखने वाले सभी पत्रकारों एवं संपादकों को नमन करते हुए कहा कि वे भारत निर्माण करने वाले कलम के सिपाही थे। सिंधिया ने अपने परिवार के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों द्वारा प्रकाशित ‘स्वदेश’ समाचार पत्र ने ग्वालियर क्षेत्र में जनचेतना के प्रसार और सामाजिक जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि पत्रकारिता आज अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि कलम के सिपाहियों ने अपने व्यक्तिगत हितों को पीछे रखकर समाज और राष्ट्रहित में कार्य किया। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष भारतीय इतिहास और समाज के विकास की महत्वपूर्ण यात्रा के साक्षी रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की यात्रा प्रतिरोध की यात्रा रही है। उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारों को चेताया था कि पत्रकारिता के मार्ग में अनेक प्रलोभन आएंगे, लेकिन जिस दिन पत्रकार उन्हें स्वीकार कर लेगा, उसी दिन उसकी पत्रकारिता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यात्रा का क्रमवार एवं वर्षवार विवरण प्रस्तुत किया। वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि लोकतंत्र और पत्रकारिता एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित प्रत्येक सामग्री समाचार नहीं होती, पत्रकारिता की अपनी विश्वसनीयता, मर्यादा और जिम्मेदारी होती है।read more:https://pahaltoday.com/india-has-seen-decisive-and-unprecedented-change-in-12-years-abhilash-kaushal/वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता का वर्तमान स्वरूप अनेक पत्रकारों के त्याग, तपस्या और संघर्ष का परिणाम है।कार्यक्रम के दौरान हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक विशेष वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। साथ ही हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्मारक डाक टिकट का विमोचन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के इतिहास और विकास को दर्शाती एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित जनों ने विशेष रुचि के साथ देखा।समारोह में प्रधानमंत्री द्वारा हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर प्रेषित संदेश का वाचन किया गया। साथ ही विजयदत्त श्रीधर द्वारा लिखित पुस्तक ‘हिंदी पत्रकारिता : 200 वर्ष की महागाथा’ ग्रंथ का विमोचन किया गया। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा प्रकाशित हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर आधारित विशेषांक का भी लोकार्पण किया गया।कार्यक्रम में देशभर से आए पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा संचार जगत से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।