बंगाल में चला ‘दादा’ का जादू!

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 कोलकाता। श्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका चर्चा में है, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है ‘दादा’ यानी मिथुन चक्रवर्ती ने। मुख्यमंत्री सुवेंदु के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर मिथुन चक्रवर्ती से विशेष मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई लंबी बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में यह संदेश दिया कि बंगाल में भाजपा की सफलता में मिथुन चक्रवर्ती की भूमिका को पार्टी शीर्ष नेतृत्व भी अहम मान रहा है। मंच पर दिखा सम्मान और अपनापन दरअसल शपथ ग्रहण समारोह में मिथुन चक्रवर्ती जैसे ही मंच पर पहुंचे, वहां मौजूद भाजपा नेताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के दौरान मिथुन ने सम्मान स्वरूप उनके पैर छूने की कोशिश की, लेकिन राजनाथ सिंह ने उन्हें रोक लिया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें गले लगाकर अभिवादन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि भाजपा नेतृत्व की ओर से मिथुन चक्रवर्ती के योगदान को सार्वजनिक सम्मान देने का संकेत भी था। पर्दे के पीछे से मजबूत की भाजपा मिथुन चक्रवर्ती लंबे समय से भाजपा के लिए बंगाल में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2021 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने लगातार पार्टी के लिए प्रचार किया और बंगाल में भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उस समय बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री में भाजपा के समर्थन को लेकर काफी विरोध का माहौल माना जाता था।read more:https://pahaltoday.com/complaints-should-be-resolved-on-the-ground-and-not-on-paper-asp/कई कलाकार खुलकर भाजपा के पक्ष में आने से बचते थे। ऐसे माहौल में मिथुन चक्रवर्ती का भाजपा से जुड़ना बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया था। जनता से जोड़ा भावनात्मक रिश्ता मिथुन चक्रवर्ती की लोकप्रियता केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रही। कोलकाता के उच्च वर्ग से लेकर सुंदरबन के मछुआरों और पुरुलिया के आदिवासी क्षेत्रों तक उनकी मजबूत पकड़ देखने को मिली। अपनी सभाओं और भाषणों में उन्होंने गरीबों, शोषितों और आम बंगालियों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मिथुन ने भाजपा और बंगाल की जनता के बीच भावनात्मक संबंध बनाने का काम किया। बिना पद की चाह के निभाई बड़ी भूमिका भाजपा की जीत के बाद भी मिथुन चक्रवर्ती ने किसी बड़े पद की इच्छा जाहिर नहीं की। पार्टी के लिए लगातार काम करते हुए उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मिथुन चक्रवर्ती ने बंगाल में भाजपा की जीत की मजबूत पटकथा लिखने में अहम योगदान दिया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मंच पर व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलना इसी भूमिका की स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।

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