कैलास मानसरोवर मुक्ति व तिब्बत आजादी के लिए आंदोलन जरूरी

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कैलास मानसरोवर मुक्ति व तिब्बत आजादी के लिए आंदोलन जरूरी
 डॉ ममता मणि के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व कालिंदी के क्षेत्रीय सहसंयोजक बनने पर सभी ने किया।
कुशीनगर। तिब्बत की आजादी तभी संभव है, जब भगवान शंकर की जन्म स्थली कैलास मानसरोवर को मुक्त कराने के लिए हर देशवासी संकल्पित हो। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
इस आशय के विचार भारत तिब्बत समन्वय संघ के केन्द्रीय परामर्शदात्री समिति सदस्य पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने व्यक्त किये। श्री त्रिपाठी बुद्धनगरी कुशीनगर में भारत तिब्बत समन्वय संघ की सांगठनिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान देवों के देव महादेव की मूल स्थली कैलास मंनसरोवर की मुक्ति व तिब्बत की आजादी के अभियान को जनांदोलन का रूप देने का संकल्प लिया गया। इस बात पर सबने अपनी सहमति जताई। पूर्व विधायक ने कहा कि जब तक राममंदिर का ताला नही खुला था तब तक भगवान राम का मंदिर नेपथ्य में रहा। ज्योंही राम मंदिर का ताला खुला, इसके बाद भगवान राम के भव्य मंदिर बनाने की सुगबुगाहट शुरू हुई। फिर देश भर में राममंदिर शिलापूजन अभियान शुरू हुआ। इसके साथ ही यह देशवासियों के लिए आस्था व अस्तित्व का मुद्दा बना । इसके बाद के संघर्षों के परिणाम आगामी 22 जनवरी को सबके सामने फलीभूत होगा। इसी तरह भगवान शंकर की जन्म स्थली की मुक्ति के लिए जब तक आमजनमानस चैतन्य नहीं होगा तब तक हमारा संकल्प पूरा नहीं होगा। बैठक को संघ के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष हनुमान इंटर कालेज, पडरौना के प्रधानाचार्य शैलेन्द्र दत्त शुक्ल ने आगामी 14 जनवरी को संघ की स्थापना दिवस की पूर्वसंध्या पर कुशीनगर में संगोष्ठी आयोजित करने का प्रस्ताव किया, जिसका करतल ध्वनि से सहमति व्यक्त की गयी। दूसरी ओर भारत तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों द्वारा उदित नारायण पीजी कालेज की प्राचार्य डॉ ममता मणि त्रिपाठी को महिला विभाग का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व समाजसेविका कालिंदी त्रिपाठी को प्रतियोगिता प्रभाग का क्षेत्रीय सह संयोजक का दायित्व प्रदान किये जाने पर इनका स्वागत किया गया। बैठक में बौद्धिक प्रभाग की क्षेत्रीय सहसंयोजक डॉ सुनीता पांडेय, महिला विभाग की जिलाध्यक्ष मीनू जिंदल, शोध प्रभाग के क्षेत्रीय सहसंयोजक मनोज शर्मा सारस्वत, जिलाध्यक्ष मूल विभाग संजय शुक्ल, मुख्य जिला संयोजक विजय पांडेय आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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