पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू के जयंती पर हुआ अधिवक्ताओं का सम्मान

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पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू के जयंती पर हुआ अधिवक्ताओं का सम्मान
गाजीपुर । अखिल भारतीय कायस्थ महासभा गाजीपुर के तत्वाधान में महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में देश की प्रथम राष्ट्रपति ,महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के अध्यक्ष रहे डॉक्टर राजेंद्र बाबू  एवं अमर बलिदानी शहीद खुदीराम बोस की जयंती पर पीर नगर स्थित डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित हुआ । इस अवसर पर महासभा के सभी कार्यकर्ताओं ने  डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की प्रतिमा और शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया और एक सच्चे देशभक्त की तरह देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने के साथ साथ देश की संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने का संकल्प लिया । माल्यार्पण कार्यक्रम के पश्चात लंका स्टेशन रोड स्थित ईं.अजीत वर्मा जी के आवास पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।. राजेंद्र बाबू की जयंती अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाते हुए महासभा ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अधिवक्ताओं को सम्मानित करने के क्रम में जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता रहे एवं सिविल बार एवं कलेक्ट्रेट बार संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे स्व. सर्वानंद वर्मा जी को मरणोपरांत राजेंद्र बाबू स्मृति सम्मान से सम्मानित किया ।महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव एवं महामंत्री अरूण सहाय ने यह सम्मान पत्र उनके पुत्र ई.अजीत वर्मा के हाथों में सौंपा। जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि सर्वानंद बाबू को सम्मानित कर हम सब अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। पुरखों का सम्मान करना हम सबका धर्म है और यह हमारी परम्परा और संस्कृति रही है। इनके सम्मान के लिए महासभा हर कीमत अदा करेगी। महासभा के संरक्षक अशोक कुमार श्रीवास्तव ने गोष्ठी में डॉ राजेन्द्र बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत रूप से  प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ राजेंद्र बाबू इस देश के महान नेता थे  । वह शुचिता और विद्वता तथा सरलता और सादगी के प्रतीक थे । वह अत्यंत मेधावी थे  । वह महान कानूनविद होने के साथ-साथ सरलता और सादगी के प्रतीक थे । वह महात्मा गांधी के अत्यंत प्रिय थे  । उन्हें बिहार का गांधी भी कहा गया । वह इतने नैतिक और ईमानदार थे की उनके राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनके पास रहने के लिए अपना कोई निजी आवास नहीं था ,उन्होंने बिहार कांग्रेस कमेटी के कार्यालय सदाकत आश्रम को अपनी रहने का ठिकाना बनाया । वह हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत हैं ,उनका जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है ‌। उन्होंने शहीद खुदीराम बोस को नमन करते हुए कहा कि वह देश की आज़ादी के लिए फांसी पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के क्रान्तिकारी देशभक्त थे। वह पहले क्रांतिकारी थे जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। इस अवसर पर मुख्य रूप से महासभा के जिला अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव के साथ साथ सभासद परवेज अहमद,अशोक कुमार श्रीवास्तव , चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव,शैल श्रीवास्तव, अरुण सहाय, अमरनाथ श्रीवास्तव, परमानन्द श्रीवास्तव,अजय कुमार श्रीवास्तव, अरूण कुमार श्रीवास्तव चुन्नू,विभोर श्रीवास्तव,राजेंद्र अस्थाना, केशव श्रीवास्तव,संजय सेवराई, अनुराग श्रीवास्तव,  आदि उपस्थित थे  ।इस संगोष्ठी की अध्यक्षता महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव एवं संचालन महासभा के जिला महामंत्री अरूण सहाय ने किया ।

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