बिहार-नेपाल बॉर्डर पर बहुत कुछ बदल रहा है, रोटी-बेटी के रिश्तों में दरार का डर

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अशोक भाटिया

,नेपाल कहने को अलग देश है लेकिन सीमावर्ती इलाकों में जाइए तो पता नहीं चलता कहां भारत खत्म होता है कि और कहां से नेपाल शुरू। इसकी एक ऐतिहासिक वजह रही है कि दोनों देशों की सीमाएं सामान्य नागरिकों में भेद नहीं करती। यहां के बाजार उनके लिए खुले हैं, वहां के सामान यहां आराम से आते हैं। दरअसल दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ रिश्तों के नीचे यही आवागमन की सुगमता बुनियाद है। लेकिन हाल फिलहाल में कुछ ऐसा हुआ है जिससे इस बुनियाद के दरकने का डर पैदा हो गया है।नेपाल की बालेन सरकार के इस नए फैसलों ने इस ‘सहज संबंध’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों देशों में इस फैसले का विरोध हो रहा है। सीमा पर बढ़ती सख्ती, कस्टम ड्यूटी की वसूली और वाहनों की जब्ती जैसी घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। : सीतामढ़ी जिले के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में हाल ही में जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने इस बदलते माहौल को और स्पष्ट कर दिया है। सोनबरसा प्रखंड के इंदरवा के पास नेपाली सुरक्षाकर्मियों द्वारा भारतीय वाहनों को रोककर जब्त किए जाने से अचानक तनाव फैल गया।बताया जाता है कि नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों के वाहनों को रोका गया और कुछ मामलों में अभद्र व्यवहार की शिकायत भी सामने आई। इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना के विरोध में भारतीय पक्ष के लोगों ने भी नेपाल से आने वाले वाहनों को रोक दिया। देखते ही देखते सीमा पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई और दोनों तरफ आवाजाही बाधित हो गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल को हस्तक्षेप करना पड़ा। उनके प्रयासों के बाद नेपाल में जब्त किए गए वाहनों को छोड़ा गया, तब जाकर हालात सामान्य हो सके।दरअसल, यह तनाव केवल एक घटना तक सीमित नहीं है। इसके पीछे नेपाल सरकार का हालिया सख्त कस्टम नियम भी बड़ा कारण बनकर सामने आया है। नेपाल की बालेन सरकार ने पुराने नियम को सख्ती से अनुपालन करा रहे हैं। पाल ने नया प्रावधान लागू करते हुए भारत से ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दिया है। यह शुल्क 5 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक हो सकता है। इसके चलते भारत-नेपाल से सटे बिहार के इलाके वाले कस्बों के बाजार में मंदी आ गई है। अविनाश कुमार, स्थानीय व्यापारी, मोतिहारी बताते है  कि इससे हमारा कारोबार ठप हो जाएगा। हम रोजाना 50-60 हजार का माल नेपाल ले जाते थे। अब 100 रुपये से ऊपर के हर सामान पर ड्यूटी? यह तो लूट है! पहले खुला व्यापार था, अब सब बंद। हमारा रोजगार छिन जाएगा।”- नए कस्टम शुल्क के  गणित  को  इस प्रकार  समझा जा सकता है कि अगर आप रक्सौल बॉर्डर पर 1000 रुपए का सामन खरीदकर नेपाल की ओर जाते हैं तो बॉर्डर पर उस सामान की कीमत कस्टम ड्यूटी चुकाने के बाद बढ़ जाएगी। क्योंकि अगर सामानों की कैटेगरी 15 फीसदी की सीमा में होगी तो उसपर 150 रुपए का सीमा शुल्क लगेगा, 13 फीसदी वैट पर 149।5 रुपए देना होगा। इस तरह 1000 का सामान आपको 1299।5 रुपए में पड़ेगा। यही वजह है कि नेपाल से लोग भारत से सटे बॉर्डर पर खरीददारी को नहीं आ रहे हैं।इस नियम का सीधा असर सीमावर्ती इलाकों के लोगों पर पड़ रहा है, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी दोनों देशों के बाजारों पर निर्भर करती है। पहले जहां लोग बिना रोक-टोक आवाजाही करते थे, अब उन्हें हर छोटे सामान पर भी शुल्क देना पड़ रहा है।  मोतिहारी के व्यापारियों का  आरोप  है कि नेपाल सरकार ने यह कस्टम नियम 15 अप्रैल से लागू किया है। इसका मकसद अपना स्थानीय उद्योग बचाना और राजस्व बढ़ाना बताया जा रहा है। लेकिन भारत-नेपाल के बीच 1950 की व्यापार संधि में खुला व्यापार का प्रावधान है। व्यापारियों का आरोप है कि नेपाल एकतरफा फैसला ले रहा है।इसलिए हम केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं। यह भारत-नेपाल के बीच 1950 की संधि का उल्लंघन है। अगर नियम नहीं बदला गया तो सीमा पर आंदोलन होगा। नेपाल में भारतीय सामान सस्ता मिलता था, इसलिए बिक्री अच्छी थी। 80% ड्यूटी लगेगी तो कीमतें दोगुनी हो जाएंगी। ग्राहक कौन खरीदेगा?”अररिया जिले के जोगबनी बॉर्डर से लेकर आमबारी तक करीब 28 किलोमीटर के क्षेत्र में इस नियम का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है। हालांकि फिलहाल भीड़ कम है, लेकिन व्यापारियों में चिंता बढ़ती जा रही है।स्थानीय व्यापारियों का यह भी  कहना है कि अगर यह नियम लंबे समय तक जारी रहा, तो उनके कारोबार पर गंभीर असर पड़ेगा। ग्राहक कम होंगे और सीमावर्ती बाजारों की रौनक खत्म हो सकती है।read more:https://pahaltoday.com/now-90-percent-indigenous-material-will-be-used-in-the-hi-tech-armored-platform/नेपाल बॉर्डर पर  आने वाले ज्यादातर ग्राहक नेपाली थे, जिन्हें कम कीमत में सामान मिल रहा था। मोतिहारी के रक्सौल बॉर्डर पर भी स्थिति अलग नहीं है। यहां से नेपाल के बीरगंज तक रोजाना बड़ी मात्रा में सामान जाता था, लेकिन अब व्यापार लगभग ठप होने की कगार पर है।व्यापारियों का कहना है कि 100 रुपये से ऊपर हर सामान पर टैक्स लगने से लागत बढ़ जाएगी और ग्राहक खरीदारी से पीछे हट जाएंगे। इससे छोटे व्यापारियों और मजदूरों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। फिर नेपाल से कटे बिहार के कुछ जिलों में नेपाली वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी गई है। इससे सीमावर्ती इलाकों में लोगों को बहुत तकलीफ हो रही है। दरअसल नेपाल में पेट्रोल की कीमत 31 रुपये ज्यादा है। रोक के पीछे वजह बताई जा रही है कि यहां से पेट्रोल-डीजल की तस्करी हो रही है। हालांकि, आपात स्थिति में 50 से 100 रुपये की पेट्रोल-डीजल देने की इजाजत है। अररिया, किशनगंज में सीमा से सटे पेट्रोल पंप काफी हद तक नेपाली खरीदारों से भरे रहते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। नेपाल वैसे भी पेट्रोल-डीजल के लिए भारत पर बहुत निर्भर रहता है लेकिन ईरान युद्ध के कारण स्थिति और विकट हो गई है। नेपाल में पिछले कुछ दिनों में कई बार दामों में इजाफा हुआ है। ऊपर से भारत में रोक लग जाने से नेपाली बहुत परेशान हैं। अब वहां के नेता मदद की गुहार लगा रहे हैं। नेपाल की महिला नेता ममता शर्मा पीएम मोदी को एक चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने नेपाल और भारत के ऐतिहासिक रिश्तों की याद दिलाई है। : बालेन सरकार का तर्क है कि यह कदम स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और राजस्व बढ़ाने के लिए उठाया गया है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच 1950 की संधि के तहत खुले व्यापार और आवागमन की जो परंपरा रही है, उस पर इस तरह के एकतरफा फैसले असर डाल सकते हैं। चूंकि भारत और नेपाल सिर्फ बॉर्डर नहीं हैं बल्कि संबंधों की डोर है। सबसे बड़ी चिंता ‘रोटी-बेटी’ के उस रिश्ते को लेकर है, जो वर्षों से दोनों देशों को जोड़ता आया है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक संबंध दोनों तरफ फैले हुए हैं।: अगर इसी तरह सख्ती और नियम बढ़ते रहे, तो यह संबंध केवल कागजों तक सिमट कर रह सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में जरूर है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा भारत-नेपाल संबंधों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। सवाल यह भी है कि भारत के हाथ से नेपाल छूटा तो क्या होगा ?कुल मिलाकर युद्ध हो रहा है ईरान-अमेरिका-इजरायल में और लकीरें खिंच रही हैं भारत-नेपाल बॉर्डर पर। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो भी मजबूरियां हो लेकिन इससे सीमा के दोनों तरफ आम लोगों को इससे दुश्वारियां हो रही हैं। ये इलाका ऐसा रहा है जहां सीमा के आर-पार रोटी-बेटी का रिश्ता है। दोनों इलाके पूरी तरह से एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। खान-पान, बोल चाल, परंपराएं सब एक जैसी है। लेकिन अब ये सब अस्त व्यस्त हो रहा है। नेशनल लेवल पर ये भी ख्याल रखना चाहिए कि जैसे ही भारत के हाथ से नेपाल छूटता है, चीन उसके लिए बाहें फैला कर खड़ा रहता है।read more:https://pahaltoday.com/chief-minister-naidu-held-a-review-meeting-on-the-fuel-crisis-in-andhra-pradesh/

भारत के विदेश मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए अपनी कार्यवाही की व  बताया कि ‘हमने एक वरिष्ठ नेपाली अधिकारी का यह बयान भी देखा है कि निजी इस्तेमाल के लिए घरेलू सामान ले जा रहे आम लोगों को नहीं रोका जाएगा।’भारत के बिहार राज्य की सीमा नेपाल से लगती है। ऐसे में नेपाल के लोग बिहार आकर अपनी जरूरत का सामान ले जाते थे। अब विदेश मंत्रालय के बयान से साफ है कि निजी इस्तेमाल के लिए सामान ले जाने वाले लोगों को बिहार बॉर्डर पर नहीं रोका जाए।

उधर भारत ने चाय के आयात को लेकर नये नियम बनाए हैं जो 1 मई से लागू होने वाले हैं। इस नये नियम से लेकर नेपाली निर्यातकों की नींद उड़ गई है। नेपाल के चाय निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि भारत के इस फैसले के बाद नेपाल से विदेशी मुद्रा कमाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में भारी रूकावट आ सकती है। दरअसल टी बोर्ड इंडिया ने एक नई अधिसूचना जारी की है जिसके मुताबिक 1 मई से भारत आने वाली चाय की सभी खेपों की सख्त जांच की जाएगी जिसमें नेपाल चाय की जांच भी शामिल है। सरकार ने किसी भी देश से आने वाले चाय की सख्त लैब टेस्ट के आदेश दिए हैं जिसका मकसद मिलावट को रोकने और चाय की क्वालिटी को सुनिश्चित करना है।
जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है उसके स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत आयात की गई हर खेप की सैंपलिंग और टेस्टिंग की जाएगी। हालांकि इंस्टेंट टी और पीने के लिए तैयार चाय (रेडी-टू-ड्रिंक टी) को इससे छूट दी गई है। माना जा रहा है कि दार्जिलिंग के चाय उत्पादकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को माना गया है। वो लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि नेपाल की सस्ती चाय को ‘दार्जिलिंग टी’ बताकर बेचा जा रहा है जिससे उनका बाजार गिर रहा है। भारत के इस कड़े रुख को उसी ‘ब्रांड सुरक्षा’ से जोड़कर देखा जा रहा है।

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