हिमाचल में मछुआरों के लिए स्वर्णिम युग: ₹100 MSP की गारंटी और सब्सिडी की बौछार से सुधरेगी आजीविका

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प्रदेश की सुक्खू सरकार ने हिमाचल के हजारों मछुआरों की आजीविका को स्थायित्व और सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा घोषित ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना’ के अंतर्गत अब जलाशयों से प्राप्त मछली की खरीद पर 100 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि बाजार में नीलामी के दौरान मछली का भाव 100 रुपये से कम रहता है, तो सरकार अधिकतम 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अंतर राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से मछुआरों के बैंक खातों में जमा करेगी। इस कदम से न केवल मछुआरों को उनकी कड़ी मेहनत का उचित दाम मिलेगा, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव से होने वाले आर्थिक नुकसान से भी सुरक्षा मिलेगी।read more:https://worldtrustednews.in/it-is-a-day-to-remember-the-collection-and-preservation-of-historical-and-cultural-heritage-sonali-jain/मत्स्य पालन को एक सुरक्षित और भरोसेमंद व्यवसाय बनाने के लिए सरकार ने जलाशयों पर लगने वाली रॉयल्टी को भी 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है, जिसे आगामी वित्त वर्ष में मात्र एक प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, वर्षा ऋतु के दौरान जब मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है, तब मछुआरा परिवारों को होने वाली आय हानि की भरपाई के लिए 3500 रुपये की वार्षिक सम्मान निधि प्रदान की जाएगी। बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए सरकार जाल (Net) की खरीद पर 90 प्रतिशत और नाव की खरीद पर 70 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दे रही है। साथ ही, मछली को दिल्ली और चंडीगढ़ जैसी बड़ी मंडियों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए रेफ्रिजरेटेड वाहनों और कोल्ड स्टोरेज इकाइयों की स्थापना पर भी विशेष सब्सिडी दी जा रही है। विशेष रूप से ऊना जिला के कुटलैहड़ क्षेत्र में गोबिंद सागर झील पर निर्भर मछुआरा समुदाय में इस योजना को लेकर भारी उत्साह है। यहाँ के स्थानीय मछुआरों, जैसे सुशील कुमार और कृष्ण कुमार का मानना है कि इस पहल से उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी। प्रदेश के छह हजार से अधिक जलाशय आधारित मछुआरों को सीधे लाभ पहुँचाने वाली यह योजना मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण और मछुआरों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में मील का पत्थर साबित होगी।

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