रसोई गैस संकट से कायमगंज में हाहाकार: लंबी कतारों में उपभोक्ता, मजबूरी में जल रहे लकड़ी के चूल्हे

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कायमगंज / फर्रुखाबाद-कायमगंज क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत से उपभोक्ता बुरी तरह परेशान हैं। गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी अधिकांश उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई परिवारों को मजबूरी में फिर से लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है।गैस की अनुपलब्धता के कारण जलाने वाली लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है। पहले जो लकड़ी 3 से 4.50 रुपये प्रति किलो के बीच आसानी से मिल जाती थी, अब वही 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट की इस घड़ी में गैस वितरक  आपदा को अवसर बनाकर मुनाफा कमाने में जुटे हैं।कई उपभोक्ताओं के अनुसार उन्होंने 3 या 4 मार्च को गैस सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन अभी तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिली। उनका आरोप है कि एजेंसियों के पास स्टॉक होने के बावजूद वितरण व्यवस्था सही ढंग से नहीं की जा रही। यदि सिलेंडर समय पर हाकरों को सौंप दिए जाएं, तो वे आसानी से घर-घर पहुंचा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।परिणामस्वरूप एजेंसियों के बाहर सुबह से शाम तक उपभोक्ताओं की भीड़ और लंबी लाइनें देखी जा सकती हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समस्या और गंभीर हो सकती है। अब सवाल उठ रहा है कि इस विषम परिस्थिति में शासन-प्रशासन कब जागेगा और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगा, या फिर व्यवस्था यूँ ही कुंभकरणी नींद में सोती रहेगी। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर असर पड़ा है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा असर आम जनता की रसोई पर पड़ रहा है।
फिलहाल उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी मांग यही है कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति नियमित की जाए और वितरण व्यवस्था पारदर्शी बनाकर लोगों को राहत दी जाए।

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