महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के विश्वविद्यालय सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में आज सतर्कता जागरूकता सप्ताह–2026 के अंतर्गत जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस वर्ष सतर्कता जागरूकता सप्ताह की विषयवस्तु “सत्यनिष्ठा से समृद्धि की ओर” (Probity for Prosperity) निर्धारित की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं जनसामान्य को भ्रष्टाचार के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। इस अभियान का उद्देश्य समाज में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनचेतना विकसित करना तथा नागरिकों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं विभिन्न शासकीय नियमों और प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक बनाना है।विश्वविद्यालय में इस अभियान की शुरुआत विद्यार्थियों के विभिन्न समूहों के मध्य सतर्कता जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से की गई। इस दौरान छात्र-छात्राओं को बताया गया कि भ्रष्टाचार किस प्रकार सामाजिक, आर्थिक एवं राष्ट्रीय विकास के मार्ग में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। साथ ही उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं, सार्वजनिक सेवाओं, विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा दैनिक जीवन में संभावित अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को अपने अधिकारों एवं संबंधित नियमों की जानकारी रखने, किसी भी प्रकार के अनुचित प्रलोभन से बचने तथा संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने अपने संदेश में कहा कि “भ्रष्टाचार किसी भी राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक न्याय एवं सुशासन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही केवल प्रशासनिक व्यवस्था के आधार नहीं, बल्कि एक विकसित एवं समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की अनिवार्य शर्तें हैं। सतर्कता जागरूकता सप्ताह हमें यह संदेश देता है कि भ्रष्टाचार का उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक चेतना, कर्तव्यनिष्ठा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ईमानदारी को अपने आचरण का अभिन्न अंग बनाते हुए भ्रष्टाचार मुक्त एवं विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।इस अवसर पर सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय ने बताया कि भारत में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के आयोजन की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा, नैतिकता, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व की संस्कृति को सुदृढ़ करना है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक संगठनों में सत्यनिष्ठा की शपथ, जागरूकता कार्यक्रम तथा विभिन्न जनसहभागिता गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जा सके।डॉ. ज्योति पांडे ने कहा कि “सतर्कता केवल अनियमितताओं की पहचान करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, कर्तव्यों और नियमों के प्रति सजग रहने की सतत प्रक्रिया है। जागरूक नागरिक ही भ्रष्टाचार मुक्त समाज की वास्तविक आधारशिला हैं। विशेष रूप से युवाओं में सत्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का विकास कर हम एक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समृद्ध राष्ट्र की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समाज में भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनचेतना का प्रसार करें।कार्यक्रम के आयोजन में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री महेंद्र कुमार सिंह, सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय , सांस्कृतिक समिति एवं कल्चरल क्लब के सदस्यों सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।