महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली में भारत के लौह पुरुष एवं राष्ट्रीय एकीकरण के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में अनेक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिन्होंने पूरे विश्वविद्यालय परिवार में राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की।कार्यक्रम की शुरुआत खेल विभाग द्वारा आयोजित जोशीली ‘रन फॉर यूनिटी’ (एकता दौड़) से हुई, जिसका शुभारंभ माननीय कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर एवं हरी झंडी दिखाकर किया। विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से प्रारंभ होकर विधि विभाग तक आयोजित इस दौड़ में बड़ी संख्या में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दौड़ के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने विधि विभाग परिसर में स्थापित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।इसके पश्चात माननीय कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देश की आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने की शपथ दिलाई। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण एवं अखंड भारत के निर्माण में सरदार पटेल के बेमिसाल योगदान को भी याद किया।विधि विभाग में आयोजित समारोह का प्रारंभ माँ सरस्वती के दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पण कर किया गया। एलएलएम छात्राओं सुकृति अग्निहोत्री और वैष्णवी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का स्वागत भाषण फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज़ के हेड एवं डीन प्रो. (डॉ.) अमित सिंह ने दिया, जिन्होंने सरदार पटेल के असाधारण नेतृत्व पर प्रकाश डाला और आज के भारत में राष्ट्रीय एकता की सदैव रहने वाली अहमियत पर ज़ोर दिया।समारोह को संबोधित करते हुए श्री मनोज हरित, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन, बरेली, और श्री दीपक पांडे, सचिव, बार एसोसिएशन, बरेली ने राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को मज़बूत करने में कानूनी बिरादरी की ज़िम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए। एडवोकेट प्रतिपाल सिंह, बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, आरएसएस बरेली, ने एकजुट समाज को बढ़ावा देने में भारतीय सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के महत्व पर ज़ोर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में आज़ादी के बाद रियासतों को एक करने में सरदार पटेल की असाधारण दूरदर्शिता, पक्के इरादे और नेतृत्व क्षमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें एकता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश की तरक्की के लिए राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक अखंडता अत्यंत आवश्यक है तथा विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में इन आदर्शों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता केवल एक विचार नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय चरित्र का आधार है, तथा युवाओं को शिक्षा, अनुशासन, खेल भावना और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से सशक्त, समरस एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।प्रोग्राम का एक विशेष आकर्षण दो ज्ञानवर्धक पुस्तकों का विमोचन रहा। पहली पुस्तक ‘वैदिक सनातन धर्म एवं मानवाधिकार’, जिसे प्रो. (डॉ.) अमित सिंह ने लिखा है, मानवाधिकारों के विकास में वैदिक सनातन परंपरा के ऐतिहासिक, दार्शनिक और सभ्यतागत योगदान की पड़ताल करती है। दूसरी पुस्तक ‘जुवेनाइल जस्टिस एडमिनिस्ट्रेशन: इंडियन एंड इंटरनेशनल अप्रोच’, जिसे डॉ. प्रीति वर्मा ने लिखा है, जुवेनाइल जस्टिस एडमिनिस्ट्रेशन पर भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण की जांच करती है और आज के कानूनी सशक्तिकरण में एक बहुमूल्य योगदान देती है।दूसरे सत्र में “भारत के राजनीतिक एकीकरण और एक मज़बूत संघ के निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका” विषय पर एक अकादमिक चर्चा तथा भाषण/निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) वी. के. गुप्ता और डॉ. अरुण प्रकाश सिंह ने की। अकादमिक सत्र ने विद्यार्थियों को भारत के राजनीतिक एकीकरण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने का मंच प्रदान किया, जिनमें रियासतों का एकीकरण, इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन, जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर से जुड़ी चुनौतियाँ, एक मज़बूत भारतीय संघ की संवैधानिक नींव, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध और अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना शामिल रहे।प्रतियोगिता के अंतर्गत विद्यार्थियों ने सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक, संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक योगदान पर उत्साहपूर्वक अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसमें नीरज कुमार ने प्रथम, मयूरी ने द्वितीय तथा पूजा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को उनके प्रस्तुतीकरण और अकादमिक चर्चा में योगदान के लिए पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रेक्षा सिंह ने किया, जिन्होंने धन्यवाद ज्ञापन भी दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।इस अवसर पर फैकल्टी सदस्यों, विद्यार्थियों और प्रतिष्ठित अतिथियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम ने इस संदेश को और सशक्त किया कि राष्ट्रीय एकता केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि एक निरंतर चलने वाली संवैधानिक ज़िम्मेदारी है, जिसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। माननीय कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय के प्रेरणादायी नेतृत्व में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता, नेतृत्व और सदैव रहने वाली विरासत को एक सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की तथा सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार को एकता और अखंडता के संकल्प के प्रति प्रेरित किया।
मीडिया सेल
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली