सती की जिह्वा गिरने की मान्यता से शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है ज्वालामुखी धाम

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शक्तिनगर, सोनभद्र। शक्तिनगर स्थित मां ज्वालामुखी धाम श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती की जिह्वा गिरी थी, जिसके बाद यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। नवरात्र के अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से श्रद्धालु मां के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन के साथ आसपास लगने वाले मेले में खरीदारी भी करते हैं।मान्यता है कि भगवान शिव जब सती के पार्थिव शरीर को लेकर आकाश मार्ग से जा रहे थे, तभी इस स्थान पर उनकी जिह्वा गिरी थी। मंदिर को प्राचीन माना जाता है। बताया जाता है कि गढ़वाल गांव के राजा उदित नारायण सिंह ने पुराने मंदिर का निर्माण कराया था। समय के साथ पुराने मंदिर के स्थान पर नए मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर परिसर में प्राचीन काले पत्थर की प्रतिमा सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मां ज्वालामुखी धाम में आदिवासी समुदाय की पारंपरिक पूजा-पद्धतियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां मादर की थाप पर पारंपरिक नृत्य और जिह्वा भेदन जैसी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि पूजन के दौरान रखे गए जौ के पौधों पर मां अपना आसन ग्रहण करती हैं। मंदिर के पुजारी श्लोकी मिश्र ने बताया कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, एक आदिवासी भक्त ने अपनी जिह्वा काटकर मां को अर्पित कर दी थी। कुछ समय बाद उसकी जिह्वा पुनः ठीक हो गई। इस घटना को मां की कृपा से जोड़कर देखा जाता है। तभी से यहां अलग-अलग तरीकों से मां की आराधना करने की परंपरा चली आ रही है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette
कांगड़ा से लाई गई दिव्य ज्योति के भी होते हैं दर्शन
मंदिर के समीप स्थित गर्भगृह में कांगड़ा देवी से लाई गई दिव्य ज्योति के दर्शन भी श्रद्धालु करते हैं। भक्त इसे आस्था और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक मानते हैं। पुजारी श्लोकी मिश्र के अनुसार, उनके परिवार की 12 पीढ़ियां नियमित रूप से मंदिर में पूजा-अर्चना करती आ रही हैं। भोर में श्रृंगार और आरती के बाद गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, जिसके बाद श्रद्धालु बाहर से दर्शन करते हैं। मंदिर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर ज्वालामुखी गुफा स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गुफा के पास स्थित प्राकृतिक जलाशय को रोगों से मुक्ति से जोड़कर देखा जाता है।
नवरात्र में सुरक्षा के इंतजाम
नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था में शक्तिनगर थाना प्रभारी सत्येंद्र राय के साथ उपनिरीक्षक राम बच्चन यादव, दिनेश गौतम और रंजीत सहित पुलिसकर्मी तैनात रहे।

 

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