कांठ। नगर कांठ में अस्थायी रामलीला मंच पर प्रशासनिक कमेटी की देखरेख में रामलीला का 117 वां वार्षिक उत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को आयोजक कमेटी की ओर से धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, रावण-बाणासुर संवाद, परशुराम तपस्थली तथा लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीलाओं का मंचन किया गया। कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को रामायण की कथा से रूबरू कराया।रंगमंच पर दिखाया गया कि सीता स्वयंवर में राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार सीता स्वयंवर में भगवान शिव के धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गई। भगवान शिव के इस धनुष को लेकर रावण और बाणासुर के बीच संवाद हुआ और बाद में रावण लंका को वापस लौट गया। इसके बाद अनेक राजाओं के असफल होने पर श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से धनुष उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाई, जिससे धनुष खंड-खंड हो गया।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/इसके बाद माता सीता ने श्रीराम गले में वरमाला डालकर उन्हें अपना वर चुना। इधर धनुष टूटने की सूचना पर भगवान परशुराम क्रोधित होकर राजा जनक की सभा में पहुंचे। वहां उन्होंने धनुष तोड़ने वाले के बारे में जानकारी मांगी। जहां परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखा संवाद हुआ। अंत में परशुराम ने श्रीराम को पहचान लिया और वह राजा जनक के दरवार से चले गए। इस दौरान जय श्री राम के जयकारों की गूंज रही। व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई, कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान, विनोद नम्बरदार, सुशील नम्बरदार, केके बिश्नोई, मास्टर सुरेंद्र बिश्नोई, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र बिश्नोई, पिंटू बिश्नोई, डॉ. जितेंद्र सिंह, विजय चौहान सीटू, शुभम बिश्नोई, सनी बिश्नोई, इंद्रजीत सिंह बिश्नोई आदि रहे। बता दें कि शनिवार को आज कांठ नगर में आयोजक कमेटी के द्वारा श्रीराम बारात शोभायात्रा निकाली जाएगी।