UPI पर प्रस्तावित MDR को लेकर व्यापार मंडल चिंतित, छोटे व फुटकर व्यापारियों को शुल्क-मुक्त रखने की मांग

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गाजीपुर। 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की ओर से छोटे एवं फुटकर व्यापारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए पुनर्विचार की मांग की गई है। जिला उद्योग व्यापार मंडल, गाजीपुर की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिलाधिकारी गाजीपुर को संबोधित ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित व्यवस्था के प्रभाव का पुनः व्यापक अध्ययन कराने तथा छोटे व्यापारियों को आवश्यक राहत देने का आग्रह किया गया है।ज्ञापन में कहा गया है कि देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जन-जन तक पहुंचाने में UPI ने महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से आम नागरिकों, व्यापारियों, ग्राहकों तथा छोटे दुकानदारों के लिए भुगतान प्रक्रिया पहले की अपेक्षा सरल, त्वरित, पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है। व्यापार जगत भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में लगातार सहयोग करता रहा है।व्यापार मंडल के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी-आधारित UPI लेनदेन पर MDR लागू होने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर छोटे, मध्यम एवं फुटकर व्यापारियों के बीच व्यावहारिक चिंता उत्पन्न हुई है। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में छोटे व्यापारियों की कुछ श्रेणियों को शून्य MDR का संरक्षण प्राप्त है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे अनेक छोटे व्यापारी हैं, जिनका वास्तविक व्यावसायिक स्वरूप और UPI पर निर्भरता निर्धारित श्रेणियों से अलग हो सकती है।
छोटे व्यापारियों का लाभ मार्जिन सीमित होने का हवाला
ज्ञापन में प्रधानमंत्री से कहा गया है कि छोटे व्यापारियों की समस्या केवल शुल्क की राशि तक सीमित नहीं है। उनका भुगतान उनकी मेहनत, सीमित आमदनी और दिनभर के कारोबार का हिस्सा होता है। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, हार्डवेयर, दवा, ऑटो पार्ट्स, छोटी सेवा प्रतिष्ठान तथा अन्य फुटकर व्यापार में कई बार एक ग्राहक का भुगतान ₹2,000 से अधिक हो जाता है, जबकि व्यापारी का लाभ मार्जिन काफी सीमित रहता है।व्यापार मंडल का कहना है कि ऐसी स्थिति में UPI लेनदेन पर MDR का अतिरिक्त भार छोटे व्यापारियों के लिए वास्तविक लागत बढ़ा सकता है। व्यापार में आने वाली किसी भी अतिरिक्त लागत का अंतिम प्रभाव प्रायः उपभोक्ता पर पड़ता है। कोई भी व्यापारी लंबे समय तक अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन नहीं कर सकता। इसलिए MDR का भार वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों के माध्यम से आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। इससे महंगाई और उपभोक्ता के खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
डिजिटल भुगतान के विस्तार पर भी पड़ सकता है असर
ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले वर्षों में देश में UPI एवं डिजिटल भुगतान का प्रचलन जिस तेजी से बढ़ा है, उसने अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे समय में MDR का अतिरिक्त भार छोटे व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं में डिजिटल भुगतान के प्रति अनावश्यक हिचक पैदा कर सकता है।व्यापार मंडल ने आशंका जताई है कि इसका परिणाम ऐसा न हो कि कुछ लोग पुनः नकद लेनदेन की ओर लौटने लगें, जिससे डिजिटल भुगतान के विस्तार की गति प्रभावित होने के साथ-साथ नकद अर्थव्यवस्था के बढ़ने की संभावना भी पैदा हो। इसलिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने वाली वर्तमान व्यवस्था को अनावश्यक रूप से प्रभावित न किए जाने का आग्रह किया गया है।
व्यापार मंडल ने कहा- डिजिटल भुगतान के विरोध में नहीं
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि व्यापार मंडल किसी भी रूप में डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध नहीं करता। इसके विपरीत UPI की सफलता और उसकी विश्वसनीयता को बनाए रखना व्यापार जगत के हित में है। संगठन का आग्रह केवल इतना है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे एवं फुटकर व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जो डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को और मजबूत करे तथा व्यापारी वर्ग के हितों का भी संरक्षण करे।
छोटे व्यापारियों के लिए शुल्क-मुक्त UPI व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की ओर से मांग की गई है कि 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली प्रस्तावित MDR व्यवस्था का छोटे एवं फुटकर व्यापारियों पर पड़ने वाले प्रभाव का पुनः व्यापक अध्ययन किया जाए। छोटे एवं फुटकर व्यापारियों के लिए UPI भुगतान व्यवस्था को पूर्णतः शुल्क-मुक्त रखने के विकल्प पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि किसी श्रेणी में MDR व्यवस्था आवश्यक समझी जाए तो छोटे व्यापारियों को पर्याप्त एवं व्यावहारिक संरक्षण दिया जाए। इसके लिए केवल लेनदेन की राशि को आधार बनाने के बजाय व्यापारी के वास्तविक व्यावसायिक स्वरूप एवं कारोबार की प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाए।
व्यापार मंडल ने ऐसी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है, जिससे डिजिटल भुगतान मजबूत बना रहे और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े। साथ ही 15 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित व्यवस्था लागू करने से पूर्व देश के प्रमुख व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श एवं परामर्श किए जाने की मांग की गई है, ताकि जमीनी कठिनाइयों को समझकर संतुलित निर्णय लिया जा सके।ज्ञापन में विश्वास जताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार छोटे व्यापारियों की इस व्यावहारिक चिंता पर संवेदनशीलतापूर्वक विचार करेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था तथा व्यापारी हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रदेश मंत्री राजेश प्रसाद, जिलाध्यक्ष विजय शंकर वर्मा, जिला महामंत्री अच्छे लाल कुशवाहा, जिला कोषाध्यक्ष गणेश जी वर्मा, जिला संगठन मंत्री निर्गुण दास केशरी, युवा जिलाध्यक्ष नवीन चन्द्र जायसवाल, नगर अध्यक्ष मनोज वर्मा, नगर महामंत्री पवन वर्मा, जिला युवा महामंत्री सोनू राइनी, जिला मंत्री जयप्रकाश कसेरा, नगर युवा अध्यक्ष संदीप वर्मा, आईटी मंच अध्यक्ष नैयर समदानी ,जिला युवामंत्री राजेश राय, नगर युवा महामंत्री सरदार रणवीर सिंह तथा उद्योग मंच अध्यक्ष रंजन सिंह सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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