नई दिल्ली, प्रयास जुबिनाइल एड सेंटर सोसायटी के संस्थापक और आईपीएस अधिकारी रहे आमोद कुमार कंठ ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली उन बच्चों तक पहुंचने में गंभीर चुनौती का सामना कर रही है जो स्कूल के बाहर हैं या शिक्षा में सही तरीके से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही स्कूलों की संख्या बहुत ज्यादा है। इंडिया हबिटेट सेंटर के साथ मिलकर “स्कूल से बाहर के बच्चों (ओओएससी) और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (एसईडीज) के लिए वैकल्पिक और नवाचारी शिक्षा की भूमिका” पर आयोजित विषय पर उन्होंने यह बात कही।कार्यक्रम में बटरफ्लाइज की कार्यकारी निदेशक रीता पनीकार पिंटो, भारत सरकार के नेशनल इंस्टिट्यूट आफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन प्रोफेसर कमलकांत बिस्वाल, इडिया हेबीटाट सेंटर के निदेशक प्रो केजी सुरेश, एनसीईआरटी के सदस्य प्रो
read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette बिनय पटनायक, डॉ. सुजीत रंजन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यूनाइटेड वे ऑफ दिल्ली, प्रयास की इंदू रानी सिंह आदि अन्य शिक्षाविद मौजूद थे।कंठ ने कहा कि प्रयास को इस क्षेत्र में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है, जो वैकल्पिक शिक्षा केंद्रों, ब्रिज कोर्स, सुधारात्मक शिक्षा, एनआईओएस मार्ग, सामुदायिक पुस्तकालयों और सहभागी शिक्षा के माध्यम से काम कर रहा है। इस संगठन के पास वर्तमान में 330 केंद्र और इकाइयाँ हैं, 789 से अधिक सहकर्मी हैं और यह 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रोजाना लगभग 45,000 से 50,000 लाभार्थियों तक पहुँचता है। इसके कार्यक्रमों ने करीब 2.98 लाख बच्चों का समर्थन किया है और 2 लाख से अधिक हाशिए पर रहने वाले युवाओं और महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया है। कंठ ने कहा कि भारत में 4.74 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा व्यवस्था से अलग वैकल्पिक व्यवस्था की ओर ध्यान दे रहे हैं।