बाराबंकी। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से महिला सरकारी कार्मिकों के प्रसूति अवकाश के बीच दो वर्ष की अनिवार्य अवधि की बाध्यता समाप्त किए जाने के निर्णय का उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने स्वागत किया है। संघ ने इसे प्रदेश की महिला शिक्षकों और कार्मिकों के हित में महत्वपूर्ण एवं राहत भरा फैसला बताया है। संघ की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुलोचना मौर्य ने कहा कि प्रसूति अवकाश के बीच दो वर्ष की अनिवार्यता के कारण महिला शिक्षकों को लंबे समय से कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस बाध्यता के समाप्त होने से महिला शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी और वे मातृत्व के साथ अपने सेवा दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकेंगी।
read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की ओर से इस समस्या को लगातार शासन के समक्ष उठाया जाता रहा है। संघ के प्रयासों के परिणामस्वरूप महिला शिक्षकों एवं कार्मिकों के हित में यह महत्वपूर्ण निर्णय हुआ है। यह फैसला महिला सम्मान, मातृत्व के अधिकार और महिला सशक्तीकरण की दिशा में सकारात्मक कदम है। डॉ. मौर्य ने शासन एवं संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश की लाखों महिला शिक्षकों और कार्मिकों के लिए राहत और सम्मान की बड़ी जीत है। उन्होंने प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत महिला शिक्षकों एवं कार्मिकों को निर्णय के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि “संघर्ष हमारा, अधिकार हमारा और जीत हमारी” के संकल्प के साथ उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ महिला शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और हितों के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा।