नई दिल्ली, : राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा महिलाओं में राजनीतिक क्षमता संवर्द्धन के लिए आगामी 7 सितंबर को फरीदाबाद में “जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस” विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला होंगे। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में लगभग 25 राज्यों से 200 से अधिक महिला विधायक सम्मिलित होंगी।राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष सुश्री विजया राहटकर ने सोमवार को श्री बिरला से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें इस कार्यक्रम का आधिकारिक आमंत्रण सौंपा। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा महिला जनप्रतिनिधियों के लिए यह दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला 7 सितंबर को प्रातः 10:30 बजे से ताज सूरजकुंड रिज़ॉर्ट, फरीदाबाद (दिल्ली-एनसीआर) में आयोजित की जाएगी। सुश्री राहटकर ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का मुख्य आतिथ्य एवं मार्गदर्शन महिला विधायकों के लिए प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित होगा।
read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteराष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को अवगत कराया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा राजनीति में महिलाओं की सक्रियता बढ़ाने के लिए देशव्यापी क्षमता निर्माण कार्यक्रम “She is a Changemaker” चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राजनीति में सक्रिय महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उनके संवाद, लेखन और समग्र कौशल को विकसित करना है, जिससे वे प्रभावी नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम बन सकें।इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी को भी विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।महिला जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए आयोग महिला विधायकों को “जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस” पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है, ताकि उनके संबंधित राज्यों के विकास एवं प्रगति में उनके योगदान को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य महिला विधायकों की नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा लैंगिक उत्तरदायी शासन, विधायी कार्यप्रणाली, नीति-निर्माण, प्रभावी संवाद, वार्ता कौशल, निर्णय-निर्माण और समावेशी नेतृत्व की उनकी समझ को और बेहतर बनाना है, ताकि वे लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में अधिक प्रभावी ढंग से अपना योगदान दे सकें।