अनिकेत सिंह
घर-कलेश एक ऐसा खतरनाक वायरस है, जिसे देखा नहीं जा सकता, लेकिन महसूस किया जा सकता है। न उसका कोई रंग है और न कोई रूप। न ही उसके पास कोई धारदार हथियार है। कोई भी व्यक्ति उसे पसंद नहीं करता, फिर भी वह पिछले दरवाजे से हंसते-खेलते जीवन में प्रवेश कर जाता है और सब कुछ तहस-नहस कर देता है। इस खतरनाक वायरस के पनपने की जमीन हर व्यक्ति के मन में भरा अहंकार और समझौता न करने की नीति होती है। इस वायरस के लिए खाद का काम टीवी सीरियल, दूसरों के सुख से जलने वाले मित्र और मनमाने ढंग से बोलने की आदत करती है।घर-कलेश के वायरस का आतंक केवल भारत में ही है, ऐसा नहीं है। दुनिया के हर देश में कम या ज्यादा मात्रा में यह देखने को मिलता है। घर-कलेश का वायरस गरीब, अमीर, शिक्षित, अशिक्षित, पारंपरिक विवाह, प्रेम विवाह, सादगी से किए गए विवाह या करोड़ों रुपए खर्च करके किए गए भव्य विवाह, हर जगह दिखाई देता है। सास-बहू के अहंकार को दर्शाने वाले एकता कपूर के सीरियल महिलाओं के मन में पारिवारिक झगड़ों के बीज बोते हैं, ऐसा आरोप लगाया जाता है।ऐसा भी नहीं है कि दंपति में से कोई एक व्यक्ति अशिक्षित हो, तभी कलेश शुरू होता है। यह वायरस अविश्वास के कीचड़ से पैदा होता है और यदि समय रहते उसका खुलासा करके उसे दबाया न जाए, तो वह जिंदगी को नरक के समान बना देता है।घर-कलेश के कारण सबसे अधिक परेशानी घर के मुखिया यानी बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ती है। बच्चे रोज-रोज के झगड़े देखकर घर से बाहर प्रेम और अपनापन तलाशने लगते हैं।read more:https://pahaltoday.com/adg-conducts-surprise-inspection-of-police-office-branches-emphasizes-speedy-redressal-of-public-grievances/घर-कलेश ने अनेक परिवारों को बर्बाद कर दिया है और इसका कोई आसान समाधान नजर नहीं आता। एक कथाकार संत ने कहा था कि मैं किसी नवविवाहित दंपति को आशीर्वाद नहीं देता, क्योंकि आजकल तलाक की खबरें अधिक देखने को मिल रही हैं।सामान्य परिवारों में घर-कलेश आसपास रहने वाले लोगों के लिए तमाशा बन जाता है। दिल्ली के एक जज ने घर-कलेश से परेशान होकर आत्महत्या कर ली, तब यह मामला काफी चर्चित हुआ था। जज सहनशील होते हैं और उनका जीवन अनुकरणीय भी माना जाता है, फिर भी जज अमन शर्मा ने जब आत्महत्या की तो अंत में अपने पिता से फोन पर बात करते हुए कहा था, “अब मुझसे सहन नहीं होता।”जज की पत्नी उनका और उनके पिता का बहुत अपमान करती थी। जिस जज को देखकर लोग सम्मान के कारण खड़े हो जाते थे, वही जज अपनी पत्नी के कथित उत्पीड़न से इतने परेशान हो गए कि उन्होंने अपना जीवन समाप्त कर लिया। दिल्ली में पदस्थ यह जज मूल रूप से अलवर के रहने वाले थे। उनके पिता वकील थे।इस मामले में जज की पत्नी कथित तौर पर जज के पिता का सार्वजनिक रूप से भी अपमान करती थी और जज के बेटे की मौजूदगी में भी ऐसा करती थी। अपने पिता का अपमान जज सहन नहीं कर पाते थे और उन्होंने अपना जीवन समाप्त कर लिया। जब जज जैसे पद पर बैठा व्यक्ति भी घर-कलेश का शिकार हो जाए, तब दूसरे लोगों के लिए रोजमर्रा के झगड़े असहनीय हो जाना स्वाभाविक है। अनेक मामलों में पत्नी मायके चली जाती है और फिर शर्तों पर समझौता होता है, लेकिन ऐसा समझौता वेल्डिंग जैसा ही साबित होता है।कुछ लोग बहुत संवेदनशील होते हैं। वे दूसरों की बातों और उकसावे का शिकार बन जाते हैं। परिवार के कुछ लोग भी घर-कलेश में फंसे लोगों को सही मार्गदर्शन देने के बजाय गलत दिशा में ले जाकर कलेश को और उग्र बनाने का काम करते हैं, मानो आग में पेट्रोल डाल रहे हों। बच्चे छोटे हों और उनके भविष्य का सवाल सामने हो, तब कई घर-कलेश रुक गए हैं। परिवार के अनुभवी लोग बीच में पड़कर दोनों पक्षों को समझाते हैं और उन्हें फिर से हंसता-खेलता जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।हाल ही में घर-कलेश से जुड़े केशोद के एक बहुचर्चित मामले में प्रेम विवाह करने वाले पति ने पत्नी की हत्या करने के बाद खुद भी ट्रेन के नीचे कूदकर जीवन समाप्त कर लिया था। इस घटना से भारी सनसनी फैल गई थी। घर-कलेश नाम का यह खतरनाक वायरस अभी और कितने लोगों को अपना शिकार बनाएगा, यह कहना मुश्किल है।