सोनभद्र। रक्षाबंधन से पहले स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मंगलवार को स्नेह, सम्मान और आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल पेश की। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार राखी जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की कलाई पर बांधी। महिलाओं के हाथों से बंधी यह राखी केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हुनर को रोजगार में बदलने की कहानी भी कह गई।जिलाधिकारी ने महिलाओं के साथ बैठकर उनके द्वारा तैयार की जा रही विभिन्न प्रकार की राखियों को देखा और राखी बनाने की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने कच्चे माल की लागत, निर्माण, बिक्री और इससे होने वाली आमदनी के बारे में भी जानकारी ली। महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता की सराहना करते हुए उन्होंने स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया। जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 30 स्वयं सहायता समूहों की करीब 150 महिलाएं राखी निर्माण से जुड़ी हैं। अब तक इन महिलाओं ने करीब 20 हजार राखियां तैयार कर ली हैं। पर्व के दौरान इनकी बिक्री से समूह की महिलाओं को लाखों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। महिलाओं के लिए रक्षाबंधन महज त्योहार नहीं, बल्कि अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी बन गया है।
read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदल रही हैं और परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं। राखी बांधने के आत्मीय क्षण के दौरान जिलाधिकारी ने महिलाओं को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि समूह की बहनों द्वारा तैयार राखियां उनके हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास की पहचान हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर महिलाओं की आय बढ़ाना आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने की भी पहल की जा रही है। डे-एनआरएलएम के एफएनएचडब्ल्यू कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य सखियां स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से समूहों से जुड़े परिवारों की पात्रता संबंधी जानकारी जुटाएंगी। पात्र परिवारों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा निर्धारित पात्रता के अनुसार मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से जोड़ते हुए आयुष्मान गोल्डेन कार्ड बनवाने की कार्रवाई की जाएगी। पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ रोजगार से जोड़ना पर्याप्त नहीं है। आजीविका के साथ बाजार और स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार भी जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उनके परिवारों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान अपर जिलाधिकारी वि.रा. वागीश कुमार शुक्ला, डीसी मनरेगा रविन्द्र वीर सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी रमेश मिश्रा, उप जिलाधिकारी घोरावल विशाल कुमार समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।