बाराबंकी। परीक्षाओं में हुई धांधली और देशव्यापी युवा आक्रोश के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को सौंप दिया है। गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने इस घटनाक्रम को स्वस्थ लोकतंत्र का परिचायक बताया। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि इससे दूसरे मंत्रियों को जवाबदेही के बारे में एक मज़बूत संदेश जाएगा और शासन में सुधार आयेगा। इससे सरकार का कामकाज ज्यादा जवाबदेह और असरदार बनेगा। श्री शर्मा ने कहा, संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। जंतर-मंतर से उठी छात्र-युवाओं की आवाज़ ने लोकतंत्र की ताकत को फिर साबित किया। यह सिर्फ़ एक जीत नहीं, बल्कि संविधान और जनशक्ति में विश्वास की जीत है।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/ गांधीवादी राजनाथ शर्मा ने सभी संघर्षरत विद्यार्थियों और पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुग को इस ऐतिहासिक जीत की बधाई दी। बता दें श्री शर्मा ने छात्र आन्दोलन का समर्थन करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने लोकतंत्र में सरकार को लोगों की चिंताओं का समाधान दबाव के बजाय संवाद के जरिए करना चाहिए। आज भारत सरकार ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वाहन करते हुए छात्रों की मांगों पर विचार किया। यह जीत संविधान, डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी के आदर्शों में विश्वास की जीत है। श्री शर्मा ने बताया कि वह साठ के दशक से विद्यार्थी आंदोलन से जुड़े है। नेहरू से लेकर देश के कई शीर्षस्थ नेताओं के विरुद्ध आंदोलनों में शामिल रहा, लेकिन इस आन्दोलन ने सत्ता की चूल्हे हिला दी। आखिकार केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।