बिजनौर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही के नेतृत्व में जिलाधिकारी जसजीत कौर को ज्ञापन सौंपकर जनपद में किसानों को भ्रामक तरीके से बेचे जा रहे अमोनियम सल्फेट उर्वरक की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि कृषि विभाग द्वारा निजी क्षेत्र में आपूर्ति के लिए HURL को एनपीके उर्वरक का आवंटन किया गया था, लेकिन निजी दुकानों पर बड़े अक्षरों में “NPK” और छोटे अक्षरों में “अमोनियम सल्फेट” लिखकर उर्वरक बेचा जा रहा है। इससे किसान इसे एनपीके उर्वरक समझकर खरीद रहे हैं, जबकि वास्तव में यह केवल अमोनियम सल्फेट है।भाकियू नेताओं ने कहा कि इस प्रकार की पैकेजिंग किसानों को भ्रमित करने के साथ-साथ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की भावना के भी विपरीत है। उन्होंने बताया कि अधिकांश किसान बैग पर बड़े अक्षरों में लिखे नाम पर भरोसा कर उर्वरक खरीद लेते हैं और छोटे अक्षरों में लिखी तकनीकी जानकारी पर ध्यान नहीं दे पाते, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/संगठन ने कहा कि विशेष रूप से गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर है। गन्ने की फसल के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश तीनों पोषक तत्व आवश्यक होते हैं, जबकि अमोनियम सल्फेट केवल नाइट्रोजन और सल्फर का स्रोत है। ऐसे में किसान यदि इसे एनपीके समझकर प्रयोग करेंगे तो फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
भाकियू (अराजनैतिक) ने स्पष्ट किया कि संगठन को अमोनियम सल्फेट की बिक्री से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसकी वास्तविक पहचान छिपाकर या एनपीके का आभास देकर बेचना किसानों के साथ छल है। संगठन ने जिलाधिकारी से मांग की कि जनपद में इस प्रकार के भ्रामक तरीके से बेचे जा रहे उर्वरकों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा संबंधित विक्रेताओं और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही, प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल बालियान, जिला मीडिया प्रभारी देवानंद भुइयार, संजीव अहलावत, कपिल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।