गागलहेड़ी। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे श्रद्धालुओं की अटूट आस्था हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर दण्डवत करते हुए आगे बढ़ रहे पिता-पुत्र और उनकी सहायता कर रही माता श्रद्धालुओं व राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हरियाणा के पंचकूला निवासी 53 वर्षीय जीत सिंह अपनी पत्नी सरोज तथा दो पुत्रों राजीव और ओमकुमार के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। जीत सिंह मजदूरी करते हैं, जबकि उनके पुत्र क्रमशः कक्षा 9 और कक्षा 7 के छात्र हैं। दोनों बच्चे दण्डवत करते हुए यात्रा पूरी कर रहे हैं और उनकी माता सरोज पूरे मार्ग में उनका सहयोग कर रही हैं।read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/श्रद्धालुओं का यह समर्पण देखकर लोग उनकी हौसला अफजाई कर रहे हैं। वहीं पंचकूला के सूरजपुर गांव से आए श्रद्धालु रोहित और ललित 121 लीटर गंगाजल की कलश कांवड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। उनके साथ अजय 81 लीटर, दिलखुश 51 लीटर तथा कल्लू 41 लीटर गंगाजल की कलश कांवड़ लेकर लौट रहे हैं। रोहित और ललित ने बताया कि यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है। उन्होंने कहा कि शिव चतुर्दशी के अवसर पर अपनी टोली के साथ गांव के शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। कांवड़ यात्रा मार्ग पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और ष्बम-बम भोलेष् के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं की आस्था, अनुशासन और सेवा भावना यात्रा को और अधिक भव्य बना रही है।