‘जलालाबाद’ से ‘परशुरामपुरी’ तक: नाम परिवर्तन को ए.के. शर्मा ने बताया सांस्कृतिक अस्मिता की पुनर्स्थापना

Share

वाराणसी।शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ किए जाने के उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद के फैसले को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के सम्मान का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी नगर का नाम बदलने का निर्णय नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है, जो समय के साथ धूमिल हो गई थी।read more:https://pahaltoday.com/sukesh-chandrashekhar-granted-bail-in-rs-200-crore-money-laundering-case/
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम की जन्मस्थली और महर्षि जमदग्नि की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र का मूल स्वरूप लंबे समय से जनमानस की आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार कर सरकार ने करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया है।उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंत्रिपरिषद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार से आवश्यक अनापत्ति मिलने के बाद लिया गया यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगा। इससे भगवान परशुराम से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा मिलेगी।ए.के. शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों की मूल पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।उन्होंने विश्वास जताया कि ‘परशुरामपुरी’ नाम केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा के सम्मान का सशक्त प्रतीक बनकर उभरेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *