एपीआई की मासिक वैज्ञानिक संगोष्ठी में आधुनिक उपचार पद्धतियों और जीवनशैली सुधार पर दिया गया जोर

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सहारनपुर। एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई), सहारनपुर शाखा की मासिक वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन अंबाला रोड स्थित एक होटल में किया गया। संगोष्ठी में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. रजत बंसल और वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. रवि ठक्कर ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के बीच महत्वपूर्ण चिकित्सीय विषयों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. रजत बंसल ने जीईआरडी (यानी गैस्ट्रो-इसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज के लक्षणों और उपचार पर जानकारी देते हुए बताया कि सीने में जलन, एसिडिटी, भोजन का मुंह तक वापस आना, लगातार गला खराब रहना और सूखी खांसी इसके प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि यदि 12 सप्ताह तक नियमित दवा लेने के बाद भी मरीज को आराम नहीं मिलता तो आवश्यक जांच कर बीमारी के वास्तविक कारण का पता लगाना चाहिए। वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. रवि ठक्कर ने क्रेनियो-वर्टिबरल जंक्शन की चोटों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस हिस्से की सर्जरी अत्यंत जटिल होती है, क्योंकि यहां कई महत्वपूर्ण नसें होती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी सर्जरी केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा अत्यधिक सावधानी के साथ की जानी चाहिए।read more:https://pahaltoday.com/bangladesh-foreign-minister-who-met-jaishankar-said-send-sheikh-hasina-back/एपीआई के अध्यक्ष डॉ. कलीम अहमद ने कहा कि हाइपर एसिडिटी और जीईआरडी से पीड़ित मरीजों को तली-भुनी एवं अधिक मसालेदार चीजों से परहेज करना चाहिए। साथ ही धूम्रपान, शराब और बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। पर्याप्त नींद और संतुलित जीवनशैली अपनाने से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम में एपीआई के सचिव डॉ. विकास अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन वैज्ञानिक सचिव डॉ. सौम्या जैन ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनुपम मलिक, डॉ. नरेश नौसरान, डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. रजनीश दहूजा, डॉ. अनिल मलिक, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ. अतुल जैन, डॉ. विजय अग्रवाल, डॉ. प्रवीण चावला, डॉ. प्रतीक गांधी सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे।

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