लखनऊ। राज्य सूचना आयोग में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालय के विधि विद्यार्थी प्रशिक्षण हेतु आते है। राज्य सूचना आयुक्त डॉ दिलीप अग्निहोत्री प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों से सूचना के अधिकार और संवैधानिक व्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा भी करते है। विगत दिवस एक बैच का प्रशिक्षण समाप्त हुआ। इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का उल्लेख किया। जिसका मर्म यह था कि आरटीआई जनता का अधिकार है। लेकिन इसे सरकारी कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप और दबाव बनाने माध्यम नहीं बनाया जा सकता। इस अधिकार का उपयोग सकारात्मक मंशा से होना चाहिए।read more:https://pahaltoday.com/13479-rupees-refunded-to-the-account-of-the-victim-of-cyber-fraud/ निहित स्वार्थ की पूर्ति हेतु इस अधिकार का प्रयोग नहीं होना चाहिए। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि आरटीआई एक्टिविज्म अब एक नया बिजनेस बन गया है। सड़क निर्माण कार्य की निगरानी का अधिकार एक्टिविस्ट को नहीं है। केंद्र सरकार ने फंड जारी किया है, वही सड़क निर्माण का काम देखेगी। आप कोई नहीं हैं।