सहारनपुर। सहारनपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय पशु चोरी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और निशानदेही पर 15 चोरी की गई भेड़, 5 हजार रुपये नकद, वारदात में प्रयुक्त एक छोटा हाथी वाहन तथा चोरी की रकम से खरीदी गई स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल बरामद की है। गिरोह का एक सदस्य पुलिस पर फायरिंग कर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है। सहारनपुर पुलिस लाइन स्थित नवीन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में एसपी देहात मयंक पाठक ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि थाना नकुड़ क्षेत्र में हाल के दिनों में पशु चोरी की दो बड़ी घटनाएं सामने आई थीं। इनमें नल्हेड़ा गांव से 31 भेड़ों की चोरी तथा मलकपुर गांव से एक भैंस चोरी होने के मामले दर्ज किए गए थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना नकुड़ पुलिस, स्वाट टीम, एसओजी और सर्विलांस टीम को संयुक्त रूप से गिरोह की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था। 23 जून को अम्बेहटा-गंगोह मार्ग पर संयुक्त टीम ने संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया।read more:https://pahaltoday.com/district-supply-officer-inspected-the-farmer-registry-camp/ इसी दौरान एक आरोपी ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने घेराबंदी कर छह आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शोएब अंसारी, नबी हसन उर्फ सुक्का, प्रदीप, छोटू उर्फ छोटन, सलीम और मोहित के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने 15-16 जून की रात नल्हेड़ा गांव से भेड़ चोरी की थी। चोरी की गई भेड़ों में से पांच को बेचकर प्राप्त रकम से स्प्लेंडर मोटरसाइकिल खरीदी गई थी। बरामद 15 भेड़ों को आरोपी हरियाणा के करनाल में बेचने ले जा रहे थे। आरोपियों ने मलकपुर से भैंस चोरी करने और उत्तराखंड के मंगलौर क्षेत्र से भी पशु चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात कबूल की है। एसपी देहात मयंक पाठक ने बताया कि गिरोह लंबे समय से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा क्षेत्र में सक्रिय था। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। फरार आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से पशु चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और क्षेत्र के पशुपालकों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा है। संयुक्त टीम की सतर्कता और तकनीकी जांच के आधार पर यह सफलता हासिल हुई है।