तेजस एमके 1ए की मारक क्षमता, चीन के जे-10सी जेट पर भारी

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नई दिल्ली । पाकिस्तान की सैन्य शक्ति का एक बड़ा हिस्सा चीन के हथियारों पर निर्भर करता है, जहां उसकी 85प्रतिशत रक्षा आवश्यकताएं चीनी आयात से पूरी होती हैं। हालांकि, इन चीनी हथियारों की विश्वसनीयता और युद्धक क्षमता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, जैसा कि बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देखा गया था, जब भारतीय हमलों से निपटने के लिए पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की गई चीनी मिसाइलें और डिफेंस सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित हुए थे। अब, भारत के स्वदेशी चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट तेजस एमके1ए ने चीन के जे-10सी जेट, जिस पर पाकिस्तान अपनी वायुसेना की शक्ति का बड़ा आधार मानता है, को कई महत्वपूर्ण मामलों में पछाड़ दिया है। जे-10सी, जिसे बांग्लादेश जैसे देश भी खरीदने पर विचार कर रहे हैं, की तुलना में तेजस एमके1ए की हालिया रिपोर्ट ने चीनी जेट की क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।तेजस एमके1ए की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) है, जो दुश्मन के रडार पर किसी विमान की दृश्यता को निर्धारित करता है।  तेजस एमके1ए का आरसीएस मात्र 0.5 वर्ग मीटर है, जबकि चीनी जे-10सी और जेएफ-17 जैसे फाइटर जेट्स का आरसीएस 1 से 1.5 वर्ग मीटर के बीच है। इसका मतलब है कि दुश्मन के रडार पर तेजस चीनी जेट्स की तुलना में आधे से भी कम दिखाई देगा, जिससे उसका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। 0.5 वर्ग मीटर का आरसीएस तेजस एमके1ए को सेमी-स्टील्थ फाइटर जेट की श्रेणी में खड़ा करता है, जो इसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ जेट्स, जैसे अमेरिकी एफ-35 (जिसका आरसीएस 0.0015 से 0.005 वर्ग मीटर है), के करीब लाता है। सरल शब्दों में कहें तो, जहां 15 मीटर का एक फाइटर जेट दुश्मन के रडार पर मात्र एक क्रिकेट या टेनिस बॉल जितना दिखेगा, वहीं चीनी जेट्स कहीं अधिक बड़े और आसानी से डिटेक्ट किए जाने वाले होंगे, जिससे दुश्मन के लिए उनका पता लगाना अपेक्षाकृत आसान होगा। आरसीएस की इस शानदार खासियत के साथ- साथ तेजस एमके1ए एक अत्यंत उन्नत सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (एईएसए) रडार से भी लैस है। यह रडार तेजस को दुश्मन के ठिकानों का आसानी से पता लगाने में सक्षम बनाता है, जबकि दुश्मन तेजस को दूर से भी डिटेक्ट नहीं कर पाएगा।read more:https://pahaltoday.com/school-chalo-campaign-increased-awareness/यह एक ऐसी दोहरी क्षमता है जो तेजस को युद्ध के मैदान में एक निर्णायक बढ़त देती है। इसके अलावा, तेजस एमके1ए में भारत की स्वदेशी अस्त्र एमके1ए बियॉन्ड विजुअल रेंज (बवीआर) मिसाइलें तैनात हैं, जिनकी मारक क्षमता 160 किलोमीटर है। इसकी तुलना में चीनी जे-10सी और जेएफ-17 जेट्स पर तैनात पीएल-15 मिसाइलों की रेंज लगभग 140-145 किलोमीटर है। इस प्रकार, तेजस एमके1ए न केवल दुश्मन के रडार से बचने, बल्कि उसे पहले देखने और अधिक दूरी से निशाना बनाने की भी बेहतर क्षमता रखता है। ये तीन विशिष्ट खासियतें- कम आरसीएस, उन्नत एईएसए रडार और बेहतर बीवीआर मिसाइलें- मिलकर तेजस एमके1ए को एक दुर्जेय लड़ाकू विमान बनाती हैं, जो पाकिस्तान और चीन की वायुसेना के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है। भारतीय वायुसेना अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए 180 तेजस एमके1ए जेट्स खरीदने की तैयारी में है। हालांकि, इन अत्याधुनिक जेट्स की समय पर आपूर्ति में एक बड़ी बाधा है।  भारत सरकार की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा निर्मित इन जेट्स में अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक के एफ404 इंजन लगाए जाने हैं, लेकिन जीई कंपनी द्वारा इंजनों की डिलीवरी में ढिलाई बरती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, एचएएल ने कम से कम 30 जेट्स का निर्माण पूरा कर लिया है और उनका परीक्षण भी हो चुका है, बस इंजनों के आने का इंतजार है ताकि उन्हें उड़ान के लिए तैयार किया जा सके। इस विलंब के बावजूद, तेजस एमके1ए की तकनीकी श्रेष्ठता भारत की हवाई शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा करती है।

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