वंचित व जनजातीय समुदायों से जुड़े 300 बाल प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय बाल रंगमंच महोत्सव में लिया भाग

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नई दिल्ली, । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) एवं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय बाल रंगमंच महोत्सव ‘रंग पल्लव 3.0’ का सफल समापन अभिमंच सभागार, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली में हुआ।आईओसीएल के सहयोग से संचालित यह एक माह लंबा राष्ट्रीय बाल रंगमंच अभियान देशभर के ग्रामीण, जनजातीय एवं वंचित समुदायों से जुड़े लगभग 300 बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। यह महोत्सव उसी अभियान का समापन समारोह था।दो दिनों तक चले इस महोत्सव में सात राज्यों से आई आठ बाल नाट्य प्रस्तुतियों का मंचन किया गया, जिन्होंने बच्चों की कल्पनाशक्ति, संवाद कौशल तथा व्यक्तित्व विकास में रंगमंच की परिवर्तनकारी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।महोत्सव के समापन समारोह में आईओसीएल की निदेशक (मानव संसाधन) सुश्री रश्मि गोविल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। प्रख्यात अभिनेता श्री आदिल हुसैन विशिष्ट अतिथि तथा आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक (समन्वय एवं सीएसआर) श्री विभूति रंजन प्रधान विशेष अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए।राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक श्री चित्तरंजन त्रिपाठी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि श्री प्रदीप कुमार मोहंती, कुलसचिव, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।महोत्सव के प्रथम दिन ‘शांति की पुकार’ (राजघाट, दिल्ली; कार्यशाला निर्देशक – निशा त्रिवेदी, सहायक निर्देशक – प्रदीप भानुदास कांबले), ‘द मिसाइल मैन’ (तंजावुर, तमिलनाडु; कार्यशाला निर्देशक – अभिषेक गर्ग, सहायक निर्देशक – रवि वेल्लिमलाई), ‘हाताओ आबा-आबा’ (गढ़चिरौली, महाराष्ट्र; कार्यशाला निर्देशक – अखिलेश खन्ना, सहायक निर्देशक – खुशबू कुमारी) तथा ‘शबरी के राम’ (चित्रकूट, मध्य प्रदेश; कार्यशाला निर्देशक – मुस्कान गोस्वामी, सहायक निर्देशक – अदिति गुप्ता) का मंचन किया गया।महोत्सव के दूसरे एवं अंतिम दिन ‘भूतनगरी’ (नजफगढ़, दिल्ली; कार्यशाला निर्देशक – गुलशन वालिया, सहायक निर्देशक – सारिका भारती), ‘मो सांग’ (केंदुझर, ओडिशा; कार्यशाला निर्देशक – अविनाश देशपांडे, सहायक निर्देशक – देबानंद नायक), ‘दीपदान’ (जैसलमेर, राजस्थान; कार्यशाला निर्देशक – नरेश पाल सिंह चौहान) तथा ‘प्यार सत्कार’ (फिरोजपुर, पंजाब; कार्यशाला निर्देशक – प्रीतपाल रूपाणा, सहायक निर्देशक – चंदन कुमार) की प्रस्तुतियाँ हुईं।इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक श्री चित्तरंजन त्रिपाठी ने कहा, “हमारा संस्थान बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी आयु वर्गों के लिए रंगमंचीय शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है कि हम अपने नागरिकों के मन, शरीर और आत्मा के विकास पर समान रूप से ध्यान दें, और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय इस दिशा में निरंतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।”उन्होंने बाल रंगमंच के क्षेत्र में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की हालिया पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें जम्मू-कश्मीर में 75 से अधिक शिक्षकों का प्रशिक्षण, बाल सुधार गृहों के बच्चों के लिए रंगमंच कार्यशालाएँ तथा छत्तीसगढ़ के नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में रंगमंच प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।read more:https://pahaltoday.com/co-gave-instructions-for-action-against-anarchists-and-drug-addicts/अपने संदेश में आईओसीएल की निदेशक (मानव संसाधन) सुश्री रश्मि गोविल ने कहा, “रंग पल्लव बाल रंगमंच महोत्सव, जिसकी शुरुआत दिल्ली से हुई थी, आज देश के आठ विभिन्न केंद्रों तक पहुँच चुका है और विभिन्न क्षेत्रों तथा भाषाई पृष्ठभूमियों से आने वाली युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर रहा है।”उन्होंने आगे कहा, “जब भी मैं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आती हूँ, मुझे अपने विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कारों के विकास के प्रति इस संस्थान की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। रंगमंच और सिनेमा को समाज का दर्पण कहा जाता है, जबकि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। जब राष्ट्र का भविष्य समाज के दर्पण से जुड़ता है, तो वह राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देता है।”इस अवसर पर  आदिल हुसैन ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि रंगमंच एक ऐसा माध्यम है जो प्रतिभागियों को मानव सभ्यता और समाज को निकटता से समझने का अवसर देता है। हमारी पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था मुख्यतः जीविका और जीवन-निर्वाह के कौशल प्रदान करती है, किंतु आत्म-अन्वेषण के अवसर सीमित होते हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के माध्यम से मुझे अपने अंतर्मन, सामाजिक-राजनीतिक समझ और आध्यात्मिक चेतना को जानने-समझने का अवसर मिला और वह जिज्ञासा आज भी मेरे भीतर जीवित है।”रंग पल्लव पहल के आरंभ से अब तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) के माध्यम से देशभर के 1,000 से अधिक स्कूली बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।समापन समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा संस्थान की आंतरिक पत्रिका ‘राजभाषा मंजूषा’ के 30वें एवं 31वें अंक का लोकार्पण किया गया। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ रंगकर्मी एवं प्रशिक्षक श्री गुलशन वालिया द्वारा लिखित चार बाल नाटकों के संकलन ‘ओ गॉड तुस्सी ग्रेट हो’ का भी लोकार्पण किया गया।

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