राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने पर कुरियन ने दिया इस्तीफा

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई कि प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, जिसके साथ ही वह अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रहे। इस अचानक हुए इस्तीफे ने कई सवाल खड़े किए, लेकिन इसका मुख्य कारण एक संवैधानिक बाध्यता रही है। दरअसल, जॉर्ज कुरियन को प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था, लेकिन उनकी नियुक्ति राज्यसभा सदस्य के रूप में हुई थी। भारतीय संविधान के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को केंद्रीय मंत्री पद पर बने रहने के लिए संसद के किसी एक सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना अनिवार्य है। कुरियन की राज्यसभा सदस्यता की अवधि हाल ही में पूरी हो गई थी, और उन्हें इस बार दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया। ऐसे में, संवैधानिक अनिवार्यता के चलते उन्हें अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, यह एक प्रक्रियागत अनिवार्यता थी। जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले के एट्टुमानूर नगरपालिका क्षेत्र के नंबियाकुलम में हुआ था। read more:https://pahaltoday.com/the-consumer-commission-settled-the-matter-by-giving-a-cheque-of-rs-55040/65 वर्षीय कुरियन भारतीय जनता पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं, जिनका पार्टी से जुड़ाव उसके शुरुआती दौर से रहा है।  वर्ष 1980 में बीजेपी के गठन के बाद से उन्होंने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और विशेष रूप से केरल जैसे राज्य में पार्टी के विस्तार और जनाधार को मजबूत करने में अहम भूमिका अदा की। लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और जिम्मेदारियां सौंपी गईं।मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। बीजेपी नेतृत्व उन्हें दक्षिण भारत, खासकर केरल में पार्टी की राजनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण चेहरा मानता था।  अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से ईसाई समाज के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने और उन्हें मुख्यधारा में लाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। केरल में भाजपा के लिए सीमित जनाधार के बावजूद, कुरियन जैसे नेता राज्य में पार्टी की उपस्थिति और स्वीकार्यता बढ़ाने में सहायक थे।  हालांकि, कुरियन ने अतीत में केरल में विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व अब उन्हें प्रदेश की राजनीति में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिससे वे केरल में पार्टी को जमीनी स्तर पर और मजबूत कर सकें। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद, उनके पास मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से अन्य मंत्रियों को सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही, आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कुछ फेरबदल या नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, जो कि अक्सर ऐसी परिस्थितियों में होता है। यह इस्तीफा भारत की संसदीय प्रणाली में संवैधानिक नियमों के पालन के महत्व को रेखांकित करता है।

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