लखनऊः 12 वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पर आयोजित विशाल योग कार्यक्रम की भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री कुमार अशोक पांडे दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से योग को दिनचर्या की हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा कि प्राचीन भारत के ऋषियों ने सभी के लिए जीवेत शरदः शतम की कामना की थी। अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ी पूंजी बताया था। इसके लिए आहार, विहार, योग, यम, प्राणायाम का मंत्र दिया। प्रकृति के निकट रहने, उसके संरक्षण व संवर्धन के सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। बल्कि इससे मन मष्तिष्क व विचारों में भी संतुलन स्थापित होता है। यह आत्मानुशासन और आत्मसंयम का भाव भी जाग्रत करता है। योग प्राचीन काल से भारत की धरोहर है। एक बार फिर विश्व में इसकी अलख जग रही है। विश्व के प्रत्येक देश योग का महत्व समझ रहे हैं। इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धरना ध्यान, समाधि तक विस्तार है। योग को लेकर भारत का आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझ रहा है। योग सामान्य व्यायाम या कसरत नहीं है। यह सम्पूर्ण जीवनशैली को बदल देता है। इससे सकारात्मक विचार बढ़ते हैं। नकारात्मक विचारों से छुटकारा मिलता है।उन्होंने कहा कि योग केवल 21 जून तक सीमित नहीं होना चाहिए।read more:https://pahaltoday.com/raja-singh-gave-five-tips-to-the-forest-dwellers-to-face-the-challenges/इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ राष्ट्र का आधार है। भारतीय ऋषि परंपरा ने जो भी पर्व और उत्सव निर्धारित किए, उनके पीछे प्रकृति के साथ सामंजस्य का भाव रहा है। हमारी संस्कृति का उद्देश्य प्रकृति के साथ रहकर जीवन को संतुलित बनाना है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि स्वस्थ शरीर ही सभी कर्तव्यों और पुरुषार्थों की साधना का माध्यम है। यदि शरीर स्वस्थ व निरोग नहीं होगा तो कोई भी व्यक्ति जीवन के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क वाला छात्र ही अपने जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। उन्होंने बताया कि 21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। आज के दिन सूर्य का प्रकाश सबसे अधिक समय तक धरती को प्राप्त होता है। सूर्य को जगत का पिता कहा गया है। जो व्यक्ति और वनस्पति सूर्य के जितने अधिक सानिध्य में रहते हैं, उनमें उतनी ही अधिक ऊर्जा, तेज और क्षमता विकसित होती है। सूर्य हम सभी के जीवन का आधार है। योग दिवस हमें अपनी आंतरिक ऊर्जा और प्रकृति की ऊर्जा को एक साथ जोड़ने का अवसर देता है। योग की परंपरा आदियोगी भगवान शिव से प्रारंभ हुई और ऋषि-मुनियों ने इसे पूरी दुनिया तक पहुंचाया। शास्त्रों में कहा गया है कि जिसका शरीर योग की अग्नि से तपकर सुदृढ़ हो गया हो, उसके पास न रोग आता है, न समय से पहले बुढ़ापा और न ही दुर्बलता। यदि हमें रोगों और समय से पहले आने वाले बुढ़ापे से बचना है तो योग को नियमित रूप से अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा।