गाजीपुर। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत बुधवार को जखनियां ब्लॉक के खानपुर रघुबरराय गांव में किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था।read more:https://pahaltoday.com/barabanki-festival-will-be-inaugurated-from-april-10/
संस्थान के निदेशक के कुशल निर्देशन, डॉ. ए.एन. सिंह के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नीरज सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 59 किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और मिट्टी संरक्षण के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।कार्यक्रम में वैज्ञानिक दल के टीम लीडर डॉ. विकास सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेतों में यूरिया, फॉस्फेट और पोटाश जैसे रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक एवं असंतुलित प्रयोग मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति को लगातार कमजोर कर रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें, जिससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सान्याल ने किसानों को असंतुलित उर्वरक प्रयोग से पर्यावरण और फसलों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता और गुणवत्ता बनी रहती है।वहीं वैज्ञानिक शिवम कुमार राय ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा कृषि क्षेत्र में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया।गोष्ठी के दौरान किसानों ने अपनी कृषि संबंधी समस्याओं और जिज्ञासाओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखा, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों ने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी संरक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर किसानों ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक हैं, जो खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।