महंगाई की मार: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बिगड़ा गृहस्थी का बजट

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सोनभद्र। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन के दामों में वृद्धि से जहां सफर महंगा हो गया है, वहीं रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की कीमतों में भी तेजी से उछाल आया है। बढ़ती महंगाई ने मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है, जिससे लोगों को खर्चों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।read more:https://pahaltoday.com/pm-modi-said-in-mann-ki-baat-program-adopt-local-drinks-in-summer/स्थानीय लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिसका प्रभाव सब्जी, दूध, राशन, स्कूल बस, ट्यूशन फीस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों पर भी देखने को मिल रहा है। परिणामस्वरूप घर चलाना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो गया है। शक्तिनगर बाजार में खरीदारी कर रहे उपभोक्ताओं ने बताया कि पहले जहां सीमित आय में घर का खर्च आसानी से चल जाता था, वहीं अब हर महीने बजट बनाना चुनौती बन गया है। वाहन चालकों का कहना है कि बाइक और कार में ईंधन भरवाने पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे मासिक आय का बड़ा हिस्सा पेट्रोल-डीजल पर खर्च हो रहा है। लोगों के अनुसार, डीजल-पेट्रोल महंगा होने का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं है। खाद्य तेल, रिफाइंड, चीनी, दालें और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं टैक्सी, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का किराया बढ़ने से दैनिक आवागमन भी महंगा हो गया है। स्थानीय निवासी मुकेश सिंह और ग्राम प्रधान विजय गुप्ता ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि महंगाई के कारण घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों की बचत पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। नौकरीपेशा वर्ग सबसे अधिक परेशान नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि महंगाई की वजह से मासिक बचत लगभग समाप्त होती जा रही है। पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों का असर हर वस्तु पर दिखाई दे रहा है। घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना कठिन होता जा रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण अब अनावश्यक खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। कई परिवारों ने मनोरंजन, बाहर खाने और अन्य गैर-जरूरी खर्चों को सीमित कर दिया है ताकि घरेलू बजट को संतुलित रखा जा सके।

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