अभियोजन समीक्षा बैठक में लंबित वादों पर मंथन, पक्षद्रोही गवाहों पर कार्रवाई के निर्देश

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गाजीपुर। कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वेद सिंह चौहान की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सत्र न्यायालयों में लंबित वादों, अभियोजन की स्थिति, गवाहों की उपस्थिति, वारंट तामिला तथा जमानत प्रार्थना पत्रों की समीक्षा की गई। वेद सिंह चौहान ने अभियोजकों को निर्देशित किया कि अभियोजन कार्यों में गुणवत्ता और गंभीरता सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ितों को समय से न्याय मिल सके।
बैठक में बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 53 वाद निस्तारित हुए, जिनमें 10 मामलों में अभियुक्तों को सजा सुनाई गई जबकि 38 मामलों में अभियुक्त रिहा हुए। इनमें 33 मामलों में पक्षद्रोहिता तथा पांच मामलों में गुण-दोष के आधार पर अभियुक्तों को राहत मिली। एक मामले में अपील प्रस्तावित की गई। अन्य अधिनियमों के अंतर्गत पांच वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें सभी मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली।read more:https://pahaltoday.com/dera-chief-gurmeet-ram-rahim-gets-parole-for-the-16th-time/थाना कोतवाली के वर्ष 2001 के एक मामले में मा. जनपद न्यायाधीश न्यायालय ने अभियुक्त हीरालाल को दोषसिद्ध मानते हुए परिवीक्षा का लाभ प्रदान किया। इस वाद में डीजीसी कृपाशंकर राय ने प्रभावी पैरवी की। वहीं थाना दुल्लहपुर से संबंधित चोरी एवं अन्य धाराओं के चार मामलों में मा. एडीजे प्रथम न्यायालय गाजीपुर ने अभियुक्त भुंवर खरवार को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष छह माह के कारावास तथा 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इन मामलों में एडीजीसी नीरज कुमार श्रीवास्तव ने पैरवी की। थाना सादात के पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में मा. पॉक्सो न्यायालय ने अभियुक्त अरमान उर्फ भोला को 25 वर्ष के कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में रविकांत पाण्डेय द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि अभियोजन संवर्ग के अंतर्गत कुल 438 वारंट निर्गत हुए, जिनमें 243 वारंट तामिल कराए गए। सत्र न्यायालयों में 738 सम्मन जारी हुए, जिनमें 533 की तामिला हुई। कई मामलों में अधिवक्ताओं की हड़ताल एवं पीठासीन अधिकारियों के अवकाश के कारण गवाहों का परीक्षण नहीं हो सका। बैठक में यह भी बताया गया कि कुल 58 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए, जिनमें केवल एक जमानत स्वीकृत हुई जबकि 57 प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए गए। अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जमानत मामलों में पुलिस की कार्रवाई की गंभीरता पर सतर्क निगरानी रखी जाए। उन्होंने सभी अभियोजकों को निर्देशित किया कि प्रत्येक माह कम से कम एक वाद की केस डायरी तैयार कर विवेचना में हुई त्रुटियों का विश्लेषण करें, ताकि भविष्य में कमियों को दूर किया जा सके। साथ ही जिन मामलों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं, वहां विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि अभियोजन का मुख्य उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए तथा उपलब्ध सभी साक्ष्यों को न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए।

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