गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 पर भड़के भगत सिंह वर्मा, किसानों की अनदेखी पर आंदोलन की चेतावनी

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सहारनपुर, । भारतीय किसान यूनियन वर्मा एवं पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इसमें गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 में बदलाव कर चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने की तैयारी कर रही है, जिससे करोड़ों किसान प्रभावित होंगे। सहारनपुर स्थित कार्यालय पर आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए भगत सिंह वर्मा ने कहा कि वर्तमान गन्ना नियंत्रण आदेश के तहत 14 दिन के भीतर गन्ना भुगतान न करने वाली चीनी मिलों पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है, लेकिन नए आदेश में किसानों के अधिकार कमजोर किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में संचालित गन्ना कोल्हू, चरखी, खांडसारी और क्रेशर इकाइयों पर इंस्पेक्टर राज थोपने की कोशिश की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 15 किलोमीटर दूरी पर नई चीनी मिल स्थापित करने का नियम है, जिसे बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने की तैयारी हो रही है। इससे बड़े उद्योगपतियों को फायदा मिलेगा जबकि छोटे गन्ना उत्पादक और ग्रामीण उद्योग प्रभावित होंगे। भगत सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की चीनी मिलें पहले से ही गन्ना किसानों का शोषण कर रही हैं और कांटों पर भारी घटतौली की जा रही है।read more:https://pahaltoday.com/shivoham-seva-sansthan-organized-a-huge-feast/उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मांग की कि गन्ना किसानों को नकद भुगतान सुनिश्चित किया जाए और भुगतान में देरी करने वाली चीनी मिलों पर कम से कम 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू किया जाए। साथ ही घटतौली करने वाले चीनी मिल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि केंद्र की एफआरपी और प्रदेश सरकार की एसएपी व्यवस्था समाप्त कर गन्ना किसानों को सीधे ₹700 प्रति कुंतल लाभकारी मूल्य दिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गन्ने से सरकार को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
उन्होंने पृथक पश्चिम प्रदेश की मांग को दोहराते हुए कहा कि किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं और युवाओं को इस आंदोलन में भागीदारी करनी चाहिए, क्योंकि पश्चिम प्रदेश बनने से क्षेत्र के किसानों और छोटे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक में राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अशोक मलिक, राष्ट्रीय महासचिव रामकुमार नेता, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. मुर्तजा सलमानी, प्रदेश महामंत्री आसिम मलिक, प्रदेश मीडिया प्रभारी दुष्यंत सिंह, प्रदेश सचिव ऋषिपाल प्रधान गुर्जर, जिला उपाध्यक्ष मुकर्रम प्रधान, जिला मंत्री महबूब हसन, जिला संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह एडवोकेट, डॉ. यशपाल त्यागी, नैन सिंह सैनी सहित अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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