प्रसव के बाद का पहला मिनट ही नवजात के लिए है “गोल्डन मिनट”

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सीएमओ डॉ. अशोक कुमार सिंह के निर्देशन में संयुक्त जिला चिकित्सालय में ‘राष्ट्रीय एनआरपी दिवस’ के अवसर पर एक दिवसीय बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन (एनआरपी) यानी नवजात पुनर्जीवन की मूल प्रक्रिया पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के साथ स्वास्थ्य कर्मियों को आपात परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी उपचार के लिए प्रशिक्षित करना रहा। प्रशिक्षण का संचालन मुख्य प्रशिक्षक डॉ. ध्रुव कुमार मिश्रा व डॉ. माला मुनि स्वामी ने किया। उन्होंने बताया कि प्रसव के बाद का पहला एक मिनट यानी ‘गोल्डन मिनट’ नवजात के जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान नवजात को गर्म रखना, शरीर को तुरंत सुखाना, सांस और हृदय गति की जांच करना तथा आवश्यकता पड़ने पर पुनर्जीवन प्रक्रिया शुरू की जाती है। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि नवजात स्वयं सांस नहीं ले रहा हो या उसकी सांस धीमी हो, तो सबसे पहले उसके वायुमार्ग को साफ किया जाता है। इसके बाद बैग एंड मास्क (एंबू बैग) की सहायता से कृत्रिम श्वास देकर फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। हृदय गति कम होने पर छाती पर नियंत्रित दबाव देकर कार्डियक सपोर्ट दिया जाता है। गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन सपोर्ट बढ़ाने, विशेषज्ञ टीम को सक्रिय करने और जरूरत पड़ने पर उच्च केंद्र रेफर करने जैसे निर्णय तुरंत लिए जाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग की भी जानकारी दी गई। इसमें रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, नवजात पुनर्जीवन ट्रॉली और सीपैप मशीन के उपयोग का लाइव प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ये उपकरण नवजात की सांस, हृदय गति, ऑक्सीजन स्तर और शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षकों ने संक्रमण से बचाव, सही मात्रा में ऑक्सीजन देने, नवजात का तापमान सामान्य बनाए रखने और हर कदम का समय पर मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही टीमवर्क और त्वरित निर्णय क्षमता को सफल पुनर्जीवन प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।read more:https://pahaltoday.com/consumers-are-not-getting-gas-cylinders-for-the-last-45-days/
प्रशिक्षण में एसएनसीयू, एनबीएसयू और विभिन्न डिलीवरी प्वाइंट पर तैनात चिकित्सा अधिकारियों, स्त्री रोग विशेषज्ञों और स्टाफ नर्सों को इन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। एसीएमओ व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. विनय श्रीवास्तव ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद सही समय पर और वैज्ञानिक तरीके से की गई देखभाल से बड़ी संख्या में नवजातों की जान बचाई जा सकती है तथा नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। इस मौके पर जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता आरती सहित एसएनसीयू, एनबीएसयू और विभिन्न डिलीवरी प्वाइंट पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

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