वॉशिंगटन। अमेरिका, ईरान और क्यूबा को लेकर वैश्विक तनाव फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुई सैन्य झड़प ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। हालात इसतरह के बने हैं कि कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जंग की आशंका पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही। सबसे पहले क्यूबा को लेकर बयानबाजी ने हलचल मचा दी। ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि “अगला नंबर क्यूबा का हो सकता है।” उनके बयान के बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि ईरान के बाद अमेरिका क्यूबा के खिलाफ भी सख्त सैन्य या आर्थिक कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल क्यूबा पर किसी तात्कालिक सैन्य हमले की योजना नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन ने कहा कि सभी विकल्प खुले हुए हैं और अंतिम फैसला कभी भी बदला सकता है।सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने क्यूबा के सामने एक बड़ा सहायता प्रस्ताव रखा है। इसमें मानवीय सहायता, कृषि सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और सभी क्यूबाई नागरिकों को दो वर्षों तक मुफ्त स्टार्लिंक इंटरनेट सेवा देने जैसी बातें शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव के पीछे अमेरिका की रणनीति क्यूबा में राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने की है। हालांकि हवाना ने अभी तक इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया है। इस बीच अमेरिकी वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने क्यूबा पर नए प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला ने इन कदमों को “सामूहिक दंड” बताकर अमेरिका पर दूसरे देशों पर अपनी इच्छा थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन आर्थिक दबाव के जरिए क्यूबा की संप्रभुता को कमजोर करना चाहता है। उधर पश्चिम एशिया में होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से तनाव का केंद्र बन गया है। 7 अप्रैल को हुए शांति-समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा सैन्य टकराव देखने को मिला। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर उकसावे और हमले के आरोप लगाए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोतों को खतरा पैदा करने वाली ईरानी सैन्य सुविधाओं पर “रक्षात्मक कार्रवाई” की गई।read more:https://worldtrustednews.in/crowds-of-devotees-gathered-for-the-maha-rudra-yagna-in-baraon-the-atmosphere-resonated-with-vedic-mantras/अमेरिका का दावा है कि उसने केवल जवाबी हमला किया। दूसरी ओर ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में नागरिक इलाकों और दो जहाजों को निशाना बनाया गया। तनाव इतना बढ़ गया कि तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय करने पड़े। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावरों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते के लिए आगे नहीं आया तो अमेरिका और अधिक “कठोर तथा हिंसक” कार्रवाई करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शांति-समझौता अभी भी लागू है और अमेरिका बड़ा युद्ध नहीं चाहता। दिलचस्प बात यह रही कि बाद में ट्रंप ने इस पूरे टकराव को हल्का बताकर कहा कि यह “प्यार से किया गया एक हल्का सा वार” था। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकती हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को तीन चरणों वाला एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें औपचारिक शांति-समझौता, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव कम करने के उपाय और दीर्घकालिक समझौते के लिए 30 दिनों की वार्ता शामिल है। हालांकि इसमें ईरान की परमाणु गतिविधियों और जलमार्ग से निर्बाध जहाजरानी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर सीधे वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें वाशिंगटन, तेहरान और हवाना पर टिकी हैं, जहां कूटनीति और टकराव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है।