बाराबंकी। मानदेय के दीर्घकालिक लम्बित भुगतान एवं गैर विभागीय कार्य हेतु अवैधानिक दबाव के सापेक्ष में ग्राम रोजगार सेवक आकाश त्रिपाठी ने नौकरी से त्यापत्र दे दिया। उन्होंने 02 मई को उपायुक्त (श्रम रोजगार), बाराबंकी को पत्र भेजकर शासन से पदमुक्त करने का अनुरोध किया है। आकाश त्रिपाठी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वे पिछले 20 वर्षो से ग्राम रोजगार सेवक के तौर पर सेवाएं दे रहे है, किंतु इस अवधि में उन्हें नियमित रूप से मानदेय नहीं मिल रहा है। उन्होंने लिखा है कि विगत लगभग 8 माह से मेरा विधिसम्मत प्रतिमाह देय मानदेय भुगतान लम्बित है, जो कि श्रम पारिश्रमिक से सम्बन्धित व्यापित प्रावधानों एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। इसके साथ ही मेरे मानदेय से अब तक काटी गई ई०पी०एक० की सम्पूर्ण धनराशि भी मेरे यू०ए0एन0 एकाउन्ट में जमा नहीं कराई गई है जबकि इसका मांग पत्र संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा बार बार खण्ड विकास अधिकारी, सिरौलीगोसपुर को देकर धनराशि को जमा कराने का अनुरोध किया जाता रहा है। किन्तु संभवतः खण्ड विकास अधिकारी सिरौलीगोसपुर इस अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय को गम्भीरता से नहीं लेते।read more:https://pahaltoday.com/bhandara-in-lucknow-on-5th-may-to-mark-the-successful-organisation-of-somnath-yatra/
उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा कि मुझे एवं मेरे साथियों को निरंतर ऐसे कार्याे के निष्पादन हेतु बाध्य किया जा रहा है जो हमारे पद के अधिकृत दायित्वों एवं मनरेगा एक्ट में प्रचलित दिशा निर्देशों के अन्तर्गत नहीं आतेे। इस प्रकार का दबाव न केवल सेवा नियमों के विपरीत है, बल्कि यह प्रशासनिक मर्यादाओ एवं विधिक प्रावधानों का भी उल्लंघन करता है, ऐसी परिस्थितियों में कार्य करना मेरे लिए, मानसिक, व्यवसायिक एवं नैतिक रूप से अत्यन्त प्रतिकूल एवं असंगत हो गया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि उपरोक्त परिस्थितियों के दृष्टिगत वर्तमान स्थिति में अपने दायित्वों का निष्पक्ष एवं प्रभावी निर्वाहन करना संभव नहीं रह गया है ऐसे में विवश होकर मैं ग्राम रोजगार सेवक के पद से अपना त्यागपत्र प्रस्तुत करता हूं। श्री त्रिपाठी ने पत्र उपायुक्त (श्रम रोजगार), बाराबंकी को प्रेषित किया है। बताया जा रहा है कि जिले में ग्राम रोजगार सेवकों को समय पर मानदेय न देने और गैर विभागीय कार्य हेतु अवैधानिक दबाव बनाने संबंधी समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार असंतोष की आवाजें भी उठी चुकी है। आकाश त्रिपाठी का त्यागपत्र इस गंभीर मुद्दे को एक बार फिर सामने लेकर आया है, जिससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है।