आत्मदाह की चेतावनी देकर लखनऊ कूच पर निकला पीड़ित दिव्यांग

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बाराबंकी। फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम गगियापुर में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से न्याय न मिलने से परेशान एक दिव्यांग व्यक्ति ने आत्मदाह की चेतावनी देकर लखनऊ कूच करने का ऐलान कर दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। पीड़ित जैसीराम पुत्र स्व. बद्री ने आरोप लगाया है कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर दबंगों द्वारा जबरन कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, वह आर्थिक रूप से बेहद कमजोर और शारीरिक रूप से दिव्यांग है। उसकी एकमात्र बेटी भी विकलांग है, जिसके साथ वह रह रहा है। जैसीराम ने बताया कि उसने थाना फतेहपुर, उप जिलाधिकारी रामनगर, पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को फरवरी से लेकर अप्रैल 2026 तक कई बार शिकायती पत्र दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद वह सपरिवार गन्ना संस्थान में धरने पर बैठ गया, लेकिन तब भी जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षियों अमर सिंह और उसकी पत्नी राजरानी ने उसकी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया।read more:https://pahaltoday.com/sensation-in-payagpur-four-girls-missing-from-the-same-neighborhood-three-minors-included/पीड़ित ने मकान की 36 लकड़ी की धन्नी, करीब 3000 पक्की ईंट, चारा मशीन और हैंडपंप इन सभी सामानों को भी जबरन उठा ले जाने का आरोप लगाया गया है। न्याय न मिलने से आहत पीड़ित ने ऐलान किया था कि यदि 3 मई 2026 तक कार्रवाई नहीं हुई, तो वह 4 मई को बाराबंकी से लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च कर आत्मदाह करेगा। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई। सोमवार को जब पीड़ित अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गन्ना संस्थान से लखनऊ के लिए निकलने लगा, तभी फतेहपुर पुलिस और रामनगर तहसील के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने पीड़ित को समझाकर रोका और आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई होगी और दावा सही मिलने पर कब्जा दिलाया जाएगा। पीड़ित को अगले दिन थाना फतेहपुर बुलाया गया है। फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद पीड़ित ने अपना लखनऊ जाने का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया है और वह जांच प्रक्रिया में सहयोग करेगा। यह मामला प्रशासन की कार्यशैली और न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि क्या अधिकारियों के आश्वासन के बाद वास्तव में तेज और निष्पक्ष कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाता है।

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