डीह थाना क्षेत्र की परसदेपुर पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम बरगदही में रविवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां गैस सिलेंडर में लीकेज के चलते भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से 5 की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल फैल गया।मिली जानकारी के अनुसार, घर में भोजन बनाते समय अचानक गैस सिलेंडर से रिसाव शुरू हो गया। चूल्हे की आग के संपर्क में आते ही गैस ने तेज लपटों का रूप ले लिया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि घर में मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। परिवार के सदस्य जब तक कुछ समझ पाते, तब तक वे खुद ही आग की चपेट में आ चुके थे।इस हादसे में मंजू मिश्रा (42) पत्नी शिवशंकर मिश्रा, कुलदीप मिश्रा (22), अनिल मिश्रा (50), संत कुमार मिश्रा (68), आशीष (18), ऋचा (21), दीपिका (25), संगीता (40) और उमेश (37) निवासी चतुरपुर गंभीर रूप से झुलस गए।घटना की सूचना मिलते ही परसदेपुर चौकी इंचार्ज मोहित भारद्वाज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद जलते हुए सिलेंडर को घर से बाहर निकाला गया और आग पर काबू पाया गया। इसके बाद सभी घायलों को तत्काल सीएचसी डीह पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।read more:https://pahaltoday.com/oil-has-run-out-over-400-petrol-pumps-in-andhra-pradesh-shut-down/
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान 5 घायलों की हालत अधिक गंभीर होने पर उन्हें हायर सेंटर भेजा गया। इनमें 2 मरीजों को एम्स रायबरेली, जबकि 3 को KGMU लखनऊ रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार मंजू मिश्रा, अनिल मिश्रा और कुलदीप मिश्रा की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है।घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी अमृता सिंह और उपजिलाधिकारी चंद्र प्रकाश गौतम समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आग लगने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि गैस सिलेंडर और रेगुलेटर की समय-समय पर जांच होती, तो शायद इतना बड़ा हादसा टल सकता था।यह हादसा न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि गैस सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच में यदि किसी प्रकार की तकनीकी खामी या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।