बहराइच। महसी तहसील के थाना हरदी अंतर्गत महसी इलाके में सोमवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब मुख्य मार्ग के किनारे नहर के पास एक युवक का शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। सनसनीखेज पहलू यह है कि घटनास्थल महसी पुलिस चौकी से महज 600 मीटर की दूरी पर है, इसके बावजूद रात भर गश्त का दावा करने वाली पुलिस को भोर होने तक इसकी भनक तक नहीं लगी।read more:https://pahaltoday.com/cdos-intensive-inspection-strict-instructions-on-quality-nutrition-and-cleanliness-in-schools/
काम पर गया था मृतक, सुबह मिली लाश
मृतक की पहचान महसी टेपरा निवासी इंद्रसेन के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, इंद्रसेन मांगलिक कार्यक्रमों में टेंट लगाने का काम करता था। रविवार की रात भी वह रोज की तरह टेंट लगाने के काम पर घर से निकला था, लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी विदाई होगी। सोमवार सुबह राहगीरों ने नहर किनारे उसका बेजान शरीर पड़ा देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
रो-रोकर बुरा हाल, अनाथ हुईं तीन बेटियाँ
इंद्रसेन की मौत की खबर जैसे ही घर पहुँची, परिवार में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी शांति का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बदहवास होकर गिर रही है। इंद्रसेन अपने पीछे तीन नाबालिग बेटियों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया उठने के बाद अब भविष्य पर अंधकार छा गया है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और शोक व्याप्त है।
पुलिसिया मुस्तैदी पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और रात्रि गश्त के दावों की पोल खोल दी है। घटनास्थल मुख्य मार्ग पर स्थित है और पुलिस चौकी से इसकी दूरी आधा किलोमीटर से भी कम है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात भर ‘डंडाधारी’ पुलिस की गश्ती टीम कहाँ थी? यदि पुलिस वास्तव में मुस्तैद होती, तो मुख्य मार्ग पर पड़े शव पर उनकी नजर राहगीरों से पहले पड़नी चाहिए थी। जब सुबह राहगीरों का हुजूम उमड़ा, तब जाकर महसी पुलिस की नींद टूटी।
सूचना पर पहुँची हरदी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल, पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। क्या यह कोई दुर्घटना है या सोची-समझी हत्या? यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है।