शेरकोट । आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन व क्लीनिक चेकिंग के नाम पर कथित उत्पीड़न को लेकर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) की लखनऊ शाखा ने नाराजगी व्यक्त कर उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस पर रोक लगाने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
उपमुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में नीमा अध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र व महासचिव डॉ अल्लाउद्दीन ने कहा कि पूर्व में आयुष चिकित्सकों का रजिस्ट्रेशन और क्लीनिकों की जांच संबंधित विभाग के डीओ आयुर्वेद-यूनानी अधिकारियों के माध्यम से ही की जाती रही है।लेकिन वर्तमान में कई जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय द्वारा आयुष चिकित्सकों को रजिस्ट्रेशन के लिए बाध्य किया जा रहा है। साथ ही कुछ मामलों में अधिकारियों या उनके अधीनस्थों द्वारा उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आई हैं।उन्होंने हाल ही में जनपद बिजनौर के शेरकोट में महिला आयुष चिकित्सक सना के क्लीनिक पर देर रात चेकिंग और प्रताड़ना का मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।read more:https://pahaltoday.com/india-helps-maldives-which-is-facing-economic-crisis-releases-first-installment-of-rs-30-billion/नीमा ने मांग की है कि आयुष चिकित्सकों का रजिस्ट्रेशन और क्लीनिक निरीक्षण केवल उनके संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा ही कराया जाए, ताकि अनावश्यक हस्तक्षेप और उत्पीड़न से बचा जा सके। इसके अलावा संगठन ने हर वर्ष होने वाले रजिस्ट्रेशन को पूर्व की भांति पांच वर्ष में एक बार करने की मांग भी उठाई है।