स्योहारा/बिजनौर।
मशहूर शायर निदा फाजली ने कभी लिखा था— ‘हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी, जिसको भी देखना हो कई बार देखना।’ स्योहारा में घटित एक ताजा घटना ने इन पंक्तियों की कड़वी सच्चाई को समाज के सामने नग्न कर दिया है। जहाँ एक मासूम बच्ची को धार्मिक संस्कार और तालीम देने की जिम्मेदारी एक ‘गुरु’ को सौंपी गई थी, वहीं उसी गुरु ने रक्षक से भक्षक बनकर विश्वास की धज्जियां उड़ा दीं।मासूम भाई को छत पर भेजा, फिर बंद कमरे में की हैवानियतथाना स्योहारा में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, मोहल्ला हयातनगर निवासी एक महिला ने बताया कि उनकी 10 वर्षीय पुत्री और 7 वर्षीय पुत्र मोहल्ला इस्लाम नगर स्थित कारी मुशाहिद के पास कुरान शरीफ की शिक्षा लेने जाते थे। रविवार, 12 अप्रैल की शाम करीब 7 बजे जब दोनों मासूम पढ़ने पहुँचे, तो आरोपी मुशाहिद ने एक गहरी साजिश रची। उसने मासूम भाई को किसी बहाने से छत पर भेज दिया और 10 साल की मासूम छात्रा को कमरे में बंद कर लिया।आरोप है कि बंद कमरे में आरोपी ने बच्ची के साथ अत्यंत शर्मनाक और अश्लील हरकतें कीं। बच्ची किसी तरह इस दरिंदे के चंगुल से बचकर, रोती-बिलखती अपने घर पहुँची और परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।न्याय मांगने पर मिली ‘मौत की धमकी’इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना के बाद जब पीड़ित परिवार शिकायत लेकर आरोपी के घर पहुँचा, तो वहां शर्मिंदगी के बजाय अहंकार का सामना करना पड़ा। आरोप है कि मुशाहिद के पुत्र ने न केवल पीड़ित परिवार के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की, बल्कि पुलिस में जाने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी तक दे डाली।read more:https://khabarentertainment.in/bijnor-police-achieves-major-success-inter-state-flat-thief-gang-busted-3-arrested/पुलिस की त्वरित कार्रवाई: सलाखों के पीछे पहुँचा ‘हैवान’मामले की गंभीरता को देखते हुए स्योहारा पुलिस ने तत्काल हरकत में आते हुए पीड़िता की मां की तहरीर पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इस संवेदनशील मामले की कमान महिला उप-निरीक्षक काजल को सौंपी गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके विरुद्ध पॉक्सो एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता की कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।समाज में ‘गुरु’ या ‘शिक्षक’ का स्थान ईश्वर के तुल्य माना जाता है, लेकिन शिक्षक के भेष में छिपे ऐसे भेड़िए न केवल मासूमों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि पूरी मजहबी और सामाजिक शिक्षा प्रणाली पर कलंक लगा रहे हैं। मासूमों के साथ होने वाली ऐसी हैवानियत के खिलाफ केवल कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसे तत्वों का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार भी अनिवार्य है। जब तक समाज एक स्वर में इन अपराधियों के खिलाफ खड़ा नहीं होगा, तब तक हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं होंगी।