डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा बेलतारा गांव के राजनीति विशारद ‘लल्लन बाबू’ ने जब इस बार प्रधानी का बिगुल फूँका, तो उन्होंने ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘मुफ्त बिजली’ के घिसे-पिटे वादों को ठेंगा दिखा दिया। उनका नया चुनावी शगूफा था—’पितृ-पेंशन और पुरखा-कनेक्ट योजना’। लल्लन बाबू का तर्क था कि नेता जीवितों की सेवा तो सब करते हैं, लेकिन जो पूर्वज स्वर्ग में बैठकर अपनी संतानों की दुर्दशा देख रहे हैं, उनके लिए कोई कुछ नहीं करता। उन्होंने घोषणा की कि यदि वे चुनाव जीते, तो गांव के श्मशान में ‘वाई-फाई युक्त प्रेत-कॉलिंग सेंटर’ बनवाएंगे, जहाँ से ग्रामीण सीधे अपने परलोकवासी दादा-परदादाओं से सलाह ले सकेंगे कि इस बार कौन सी भैंस खरीदनी है या किस लड़के की शादी कहाँ करनी है। गांव के भोले-भाले लोग, जो पितृ पक्ष में कौवों को रोटी खिलाकर थक चुके थे, अचानक ‘टेक्नो-अध्यात्म’ के इस जादुई जाल में ऐसे फंसे कि उन्हें अपनी वर्तमान गरीबी से ज्यादा पूर्वजों की ‘नेटवर्क कनेक्टिविटी’ की चिंता होने लगी।प्रचार के अंतिम पड़ाव पर लल्लन बाबू ने गांव के पुराने कुएं के पास एक ‘आत्मा-स्कैनर’ मशीन स्थापित की, जो असल में एक कबाड़ हो चुका एक्सरे मशीन का ढांचा था जिस पर ढेर सारी चमकीली झिलमिलियां चिपकी थीं। उन्होंने दावा किया कि जो भी व्यक्ति उन्हें वोट देने की कसम खाकर इस मशीन के नीचे खड़ा होगा, उसे अपने अगले सात जन्मों का ‘आधार कार्ड’ और ‘प्रोफेशनल बायोडाटा’ तुरंत मिल जाएगा। विपक्षी उम्मीदवार ‘घसीटा राम’ बदहवास थे; वे स्कूल की मरम्मत और खाद की बात कर रहे थे, जबकि जनता को यह जानने की उत्सुकता थी कि अगले जन्म में वे राजा बनेंगे या पड़ोसी के घर के पालतू कुत्ते। लल्लन बाबू ने एक लाउडस्पीकर पर डरावनी और रहस्यमयी आवाज़ें रिकॉर्ड करके चला दीं, जिसे सुनकर ग्रामीणों को साक्षात ‘गरुड़ पुराण’ का लाइव टेलीकास्ट महसूस होने लगा।लोग अपनी मेहनत की कमाई चंदे के रूप में लल्लन बाबू के चरणों में अर्पित करने लगे ताकि उनका ‘अगला जन्म’ कम से कम सुरक्षित हो सके।मतदान के अगले दिन जब लल्लन बाबू की प्रचंड जीत हुई, तो पूरा गांव अपना ‘पुनर्जन्म का आधार कार्ड’ लेने उनके दरवाजे पर कतारबद्ध हो गया। लल्लन बाबू ने एक बड़ा सा बक्सा खोला और उसमें से छोटे-छोटे खाली शीशे के टुकड़े (आईने) सबको बांटना शुरू कर दिया। जनता हक्की-बक्की रह गई, “हुजूर, इसमें तो कुछ लिखा ही नहीं है, बस हमारा अपना चेहरा दिख रहा है!” लल्लन बाबू ने एक लंबी डकार ली और गंभीर स्वर में बोले— “मूर्खों! पुनर्जन्म का आधार कार्ड यही आईना है। इसमें गौर से अपना चेहरा देखो; जिस इंसान ने एक कोरे वादे और कबाड़ की मशीन के चक्कर में अपना भविष्य और वर्तमान मुझे बेच दिया, वह अगले जन्म में ‘गदहा’ बनने की पूरी योग्यता अभी से हासिल कर चुका है! पूर्वज तो स्वर्ग में आराम कर रहे हैं, पर तुम लोगों ने मेरा अगला जन्म जरूर सुधार दिया।” जनता स्तब्ध खड़ी अपनी ही परछाईं को देख रही थी और लल्लन बाबू अपनी नई पजेरो में बैठकर ‘परलोक कल्याण विभाग’ का बजट डकारने शहर की ओर कूच कर गए।