नया आयकर अधिनियम 2025 लागूू- कर प्रणाली मे बडे सुधार और सरलीकरण की दिशा मे महत्वपूर्ण कदम।

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(अरूण कुमार राघव ) गाजियाबाद-आखिरकार भारत सरकार द्वारा कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी एवं डिजिटल बनाने के उद्देश्य से नया आयकर अधिनियम, 2025 दिनांक 01 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया गया है। यह अधिनियम वर्ष 1961 के पुराने आयकर अधिनियम का स्थान लेता है और साथ ही करदाताओ और पेशेवरो के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। नए अधिनियम की प्रमुख विशेषताए निम्न हैः-1 पुराने अधिनियम के 800 से अधिक सेक्शनो को घटाकर 536 कर दिया गया है, जिससे कानून अधिक सरल और समझने योग्य बना है।2 अब कर निर्धारण वर्ष की अवधारणा समाप्त कर दी गयी है और उसके स्थान पर टैक्स ईयर का एकल काँन्सेप्ट लागूू किया गया है।3 टैक्स स्लैब मे कोई बदलाव नही किया गया है। वर्तमान टैक्स दरो को यथावत रखा गया है।4 धारा 87ए के तहत रू0 60000/- तक की रिबेट उपलब्ध रहेगी, जिससे रू0 12 लाख तक की आय पर प्रभावी टैक्स देनदारी शुन्य हो सकती है।5 नया टैक्स सिस्टम डिफाँल्ट रहेगा, जबकि पुराना टैक्स सिस्टम विकल्प के रूप मे उपलब्ध रहेगा।6 वेतनभोगी करदाताओ के लिए एजुकेशन अलाउंस बढाकर रू0 3000/- प्रति माह प्रति बच्चा किया गया है।हाँस्टल अलाउंस बढाकर रू0 9000/- प्रति माह प्रति बच्चा किया गया है।एचआरए मे नए शहर शामिल किए गए है।इंटरेस्ट फ्री लोन की सीमा को बढाया गया है।मील वाउचर सीमा को भी बढाकर रू0 200/- प्रति मील किया गया है। यह सभी अलाउंस पुरानी कर प्रणाली अर्थात ओल्ड रिजीम को चुनने पर ही मिलेंगे। न्यू रिजीम मे यह व्यवस्था नही है।7 फाँर्म 16 के स्थान पर फाँर्म 130 जारी किया गया है।फाँर्म 16ए के स्थान पर फाँर्म 131 जारी किया गया है।फाँर्म 26एएस के स्थान पर फाँर्म 168 जारी किया गया है। अन्य फाँर्मो मे भी बदलाव किया गया है।8 आईटीआर 1 व 2 की फाइलिंग की अंतिम तिथि प्रतिवर्ष 31 जुलाई निर्धारित की गयी है।आईटीआर 3 व 4 नाँन आँडिट की फाइलिंग की अंतिम तिथि प्रतिवर्ष 31 अगस्त निर्धारित की गयी है।आईटीआर यूू 4 वर्ष तक फाइल कर सकते है।विलम्ब शुल्क अधिकतम रू0 5000/- रहेगा।9 आँप्शंस एवं फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर एसटीटी को बढाया गया है जिससे इनकी ट्रेडिंग महंगी होगी।10 बायबैक टैक्सेशन इन्वैस्टर्स पर शिफ्ट हो गया है। अब टैक्स कम्पनी के स्थान पर निवेशको के हाथो मे कैपिटल गेन के रूप मे लगेगा।11 विदेशी शिक्षा, मेडिकल एवं टूर पैकेज पर टीसीएस की दरे कम की गयी है।12 टीडीएस व टीसीएस मे पैन आधारित ट्रैकिंग एवं आँटोमेटेड सिस्टम लागूू किया गया है।13 रू0 1 करोड तक की अनडिस्क्लोज्ड विदेशी संपत्तियो के लिए एक बार का अवसर देते हुए, फाँरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम लागूू की गयी है।14 क्रिप्टो पर सख्त नियम लागू किए गए है। क्रिप्टो पर 30 प्रतिशत का कर जारी रहेगा साथ ही गलत जानकारी देने पर 200 प्रतिशत तक पेनाल्टी का प्रावधान किया गया है।15 पूरी तरह डिजिटल टैक्स प्रशासन हेतु फेसलैस असेसमेंट एवं आँटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम लागू किया गया है।16 बडे वित्तीय लेन देन मे पैन अनिवार्यता के नियम कडे किए गए है जैसे एक वर्ष मे दस लाख से ज्यादा कैश ट्रान्जैक्शन, पांच लाख से ज्यादा की गाडी की डीलिंग, बीस लाख से ज्यादा की सम्पत्ति खरीदने तथा एक वर्ष मे एक लाख से ज्यादा के रेस्टोरेन्ट और होटल पेमेंट के लिए पैन अनिवार्य कर दिया गया है।कर प्रणाली को और प्रभावी बनाने हेतु कुछ सुझाव पूरी तरह डिजिटल सिस्टम अच्छा है परन्तु कई बार जटिल मामलो मे समस्या आती है। कोई सुनने वाला नही होता। आवश्यकता पडने पर वीडियो काँन्फ्रेसिंग के द्वारा आँनलाइन सुनवाई का विकल्प अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए। छोटे व्यापारियो के लिए एक सिंगल काँम्प्लाइंस रिटर्न शुरू किया जाना चाहिए। 12 लाख रिबेट सीमा को स्पष्ट रूप से कानून मे लिखित सीमा बनाया जाना चाहिए तथा कर की गणना को सरल बनाना चाहिए। अपडेटेड रिटर्न के लिए चार साल की विंडो अच्छी शुरूआत है परन्तु इस पर विलम्ब शुल्क अधिक है जिसे कम किए जाने की आवश्यकता है। कर विवादो को कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, जिसके लिए फास्ट ट्रेक डिस्पूट रिसोल्यूूशन सिस्टम लागू किया जाना चाहिए।

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