सोच जिंदा है: चंद्रपाल की अरष्ठी में नहीं हुआ मृत्यु भोज, यज्ञ से दी श्रद्धांजलि

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नहटौर। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले चंद्रपाल सिंह चिकारा भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी सोच आज भी लोगों को प्रेरित कर रही है।शादीपुर निवासी चंद्रपाल सिंह के निधन (30 मार्च) के बाद आयोजित अरष्ठी में परिजनों ने परंपरागत मृत्यु भोज न कर सादगी का उदाहरण पेश किया। इसके स्थान पर यज्ञ का आयोजन कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।जाट जागृति एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने बताया कि चंद्रपाल सिंह ने अपनी पत्नी के निधन पर भी मृत्यु भोज का बहिष्कार कर समाज में नई पहल की थी।वक्ताओं ने कहा कि परिजनों द्वारा उसी परंपरा को आगे बढ़ाना सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग मौजूद रहे और सभी ने मृत्यु भोज जैसी कुरीति समाप्त करने का संकल्प लिया।

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