-अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने वाला बिल हुआ पेश
नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने वाला बिल पेश किया है। इस पर सदन में चर्चा हुई। इससे पहले बुधवार को कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया। उन्होंने एफसीआरए बिल वापस लो के नारे लगाए। स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध करते रहे। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आज एफसीआरए बिल पर लोकसभा में बहस नहीं होगी। दरअसल, आज लोकसभा में विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक को बहस और पास करने के लिए लिस्ट किया गया था। एफसीआरए में संशोधन के लिए एक बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और स्पष्ट और सख्त करने का प्रस्ताव है, ताकि एनजीओ को मिलने वाले विदेशी चंदे में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक बिल में यह भी प्रावधान है कि जिन एनजीओ का पंजीकरण रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है, उनकी विदेशी फंडिंग और संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल एफसीआरए ईसाइयों, अल्पसंख्यकों और एनजीओ के खिलाफ टारगेटेड कानून है। जो एनजीओ भारत के लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, इस कानून के जरिए उन्हें सजा दी जा रही है। यह बिल असंवैधानिक है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि यह सरकार कानूनों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की आदी है, ताकि समाज की विरोधी आवाजों को दबाया जा सके। जिस तरह पीएमएलए का इस्तेमाल किया गया, उसी तरह एफसीआरए को भी हथियार बनाया जा रहा है। इसका एनजीओ पर भी असर पड़ेगा। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि एनजीओ की विदेशी फंडिंग को कंट्रोल करने के नाम पर लाए जा रहे इस बिल से पहले बीजेपी को पीएम केयर फंड और चुनावी बॉन्ड से मिले पैसे पर जवाब देना चाहिए।