लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता को गुटबाजी से मुक्त होकर जनसरोकारों को प्रमुखता देनी चाहिए। कलम की धार तेज कर निष्पक्ष रूप से जनता के मुद्दों को उठाना पत्रकारों का परम दायित्व है। व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एकजुटता से ही पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जनहित की रक्षा संभव है, जिससे सच सामने आए। व्यक्तिगत गुटबाजी और विचारधारात्मक टकराव ने पत्रकारिता के मूल उद्देश्य, यानी सच्चाई को सामने लाने की प्रक्रिया को कमजोर किया है। पत्रकारों की आपसी गुटबाजी और वैचारिक विभाजन पत्रकारिता की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और साख के लिए अत्यंत घातक है। जब पत्रकार या मीडिया समूह गुटों में बंटकर एजेंडा-आधारित रिपोर्टिंग करते हैं, तो आम जनता का मीडिया पर से विश्वास उठ जाता है। यह आपसी खींचतान न केवल समाचारों की गुणवत्ता को कम करती है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को कमजोर कर लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करती है। जब पत्रकारिता में व्यक्तिगत पूर्वाग्रह हावी होते हैं, तब जनहित के मुद्दे हाशिये पर चले जाते हैं। आज के दौर में, जब मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, पत्रकारों का एकजुट होना अनिवार्य है। गुटबाजी से ऊपर उठकर, एक साझा मंच पर आकर वे अपनी बात को अधिक मजबूती से रख सकते हैं। पत्रकारिता का काम सिर्फ खबरें दिखाना नहीं, बल्कि उन मुद्दों को उठाना है जो जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा, और भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दों को उजागर करने के लिए कलम की धार को तेज और निष्पक्ष होना जरूरी है।*• पत्रकारिता और गुटबाजी:* जब पत्रकार गुटों में विभाजित हो जाते हैं, तो समाचारों का निष्पक्ष विश्लेषण बाधित होता है, जिससे जनता का भरोसा कम होता है। पत्रकारिता में बढ़ती गुटबाजी, राजनीतिक और कॉरपोरेट स्वार्थों के कारण इसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता को गंभीर रूप से खतरे में डाल रही है। पत्रकार अब वैचारिक गुटों (जैसे सत्ता समर्थक या विरोधी) में बट गए हैं, जिससे तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के बजाय नैरेटिव गढ़ने पर जोर है। गुटबाजी के कारण पत्रकार अक्सर खबरों को तथ्यात्मक रूप से दिखाने के बजाय अपने गुट या निजी हितों के अनुसार प्रस्तुत करते हैं, यह विभाजन जनहित के मुद्दों को दबाकर सनसनीखेज खबरों को बढ़ावा दे रहा है। एक समय वो था कि एक पत्रकार की कलम में वो ताक़त हुआ करती थी। कि उसकी कलम से लिखा गया एक-एक शब्द राजनेताओं,व अधिकारियों की कुर्सी को हिलाकर रख देता था। जैसा कि सभी जानते है कि पत्रकारिता ने हमारे देश की आज़ादी में अहम् भूमिका निभाई। आज के डिजिटल युग मे जिस तरह से समाचार पत्र व पत्रिकाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई हैं। तो उसी तेजी से पत्रकारों की बहुत भारी संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। जिससे न केवल लोगो को नई जानकारी के साथ सरकार की जनता तक व जनता की सरकार तक बातों को पहुचाने में एक सेतु की भूमिका निभाई है वह बहुत ही सराहनीय है। लेकिन इस बीच कुछ ऐसे लोग भी पत्रकारिता से जुड़ गए है। जिनके कारण देश के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। आज के दौर में ऐसे पत्रकारों की भी लंबी चौंडी कतार लगी है। जिनका पत्रकारिता से दूर दूर तक भी कोई लेना देना नही कोई सम्बन्ध नही। सच कहें तो उनको पत्रकारिता का अर्थ तक नही पता। जो पत्रकार बने गली मोहल्लों घूमते नजर आ रहे हैं। जिस कारण दिन प्रति दिन पत्रकारिता की छवि धूमिल होती जा रही हैं, लोगों का भरोसा पत्रकारों पर से उठने या फिर कम होने लगा है। अब आये दिन समाचार पत्रों में खबरें छपती है। वह पत्रकार किसी को ब्लैकमेल कर रहा था उस थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। ऐसे ही लोग जनता में सच्चे पत्रकारों की छवि को धूमिल कर रहे है।
*• पत्रकारिता कमाई का साधन नहीं:* अपनी धाक जमाने व गाड़ी पर प्रेस लिखाने के अलावा इन्हें पत्रकारिता या किसी से कुछ लेना देना नहीं होता क्यूंकि उनके लिए सिर्फ प्रेस लिखना ही काफी है। गाड़ी पर नम्बर की ज़रूरत नहीं किसी कागज़ की ज़रूरत नहीं, हेलमेट की ज़रूरत नहीं मानो सारे नियम व क़ानून इनके लिए शून्य हो क्यूंकि सभी इनसे डरते जो हैं चाहे नेता हो,अधिकारी हो, कर्मचारी हो, पुलिस हो, अस्पताल हो सभी जगह बस इनकी धाक ही धाक रहती है, इतना ही नहीं अवैध कारोबारियों व अन्य भ्रष्टाचारी अधिकारियों, कर्मचारियों आदि लोगों से धन उगाही कर व हफ्ता वसूल कर अपनी जेबों को भर कर ऐश-ओ-आराम की ज़िन्दगी जीना पसंद कर रहे हैं व खुद भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। और समाज के सामने भ्रष्टाचार को मिटाने का ढिंढोरा पीटते हैं मानो यही सच्चे पत्रकार हो सभी लोग इनके डर से आतंकित रहते हैं कुछ तथाकथित पत्रकार तो यहाँ तक हद करते हैं कि सच्चे, ईमानदार और अपने कार्य के लिए समर्पित रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सुकून से उनका काम भी नहीं करने देते ऐसे ही लोग जनता में सच्चे पत्रकारों की छवि को धूमिल कर रहे है। कुछ युवाओं ने तो पत्रकारिता को एक शौक़ समझ लिया है। जबकि पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसे ना तो हर कोई कर सकता है और ना ही ये हर किसी के बूते की बात है। पत्रकारिता हर दौर में एक चुनौती रही है और आज भले ही मीडिया क्रांति का दौर हो लेकिन पत्रकारिता आज भी एक चुनौती है। यह बात बिलकुल सत्य है कि एक पत्रकार और उसकी पत्रकारिता अपनी कठिन मेहनत से समाज में घटित हो रही घटना से हमें रूबरू करवाते है। माध्यम बेशक तेलीविजन पर दिखाई जाने वाली खबरें हो या अखबार में।*• पत्रकारिता में घुसते कारोबारी :* आपराधिक मानसिकता के व्यक्ति अपने कारोबार को संरक्षण देने के लिए पत्रकारिता में प्रवेश कर रहे हैं जिससे भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार को बढ़ावा मिल रहा है और हमारा लोकतंत्र दिन-प्रतिदिन खोखला हो रहा है जो आज नहीं तो कल हमारे लिए घातक सिद्ध होगा। पत्रकारिता समाज का आईना होती है जो समाज की अच्छाई व बुराई को समाज के सामने लाती है अब यदि पत्रकार और बुराई के बीच में सेटिंग हो जाती है तो न अच्छाई समाज के सामने आयेगी और न ही बुराई।एक दौर था जब पत्रकार अपनी कलम की लेखनी से समाजिक हित में बड़े आंदोलनों को जन्म दिया करता था। लेकिन आज स्थितियां लगातार बदल रही हैं। पत्रकारिता पर व्यवसायिकता हावी हो गई है। जिस कारण पत्रकारिता के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। ओर अपने निजी फायदे के लिए सोशल मीडिया पर फेक न्यूज भेजने का जो चलन बढ़ा है उसका सीधा असर समाज पर पड़ रहा है व समाज में पत्रकार की छवि धूमिल हो रही है। वास्तव में सही पत्रकार समाज की कठिन समस्याओं पर भी अपनी लेखनी के माध्यम से सरकारों को चेताने की बात करते है ताकि मानव जीवन के लिए कठिन होती जा रही समस्याओं का समय रहते ही निराकरण हो सके।