शिक्षक को हार्ट अटैक पड़ने के मामले में 3 बीईओ की जांच टीम गठित

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बाराबंकी। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रधानाध्यापक को हार्ट अटैक पड़ने के मामले ने अब प्रशासनिक रूप ले लिया है। सिरौलीगौसपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बदोसराय प्रथम के प्रधानाध्यापक धर्मराज गौतम द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम गठित की गई है। यह टीम 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। प्राथमिक विद्यालय बदोसराय प्रथम के प्रधानाध्यापक धर्मराज गौतम ने सहायक अध्यापक और प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह समेत अन्य शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी। इसी शिकायत के संबंध में जांच अधिकारी बदलने और अपने स्थानांतरण की मांग को लेकर बुधवार को धर्मराज गौतम अपनी पत्नी किरन के साथ बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। सुनवाई के दौरान अचानक धर्मराज गौतम को सीने में तेज दर्द हुआ और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। तत्काल उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए लखनऊ के लारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। पत्नी किरन के अनुसार, उनके पति लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। उन्होंने बताया कि पहले भी उन्हें हार्ट अटैक आ चुका है और वर्तमान विवाद के चलते उनका तनाव और बढ़ गया था। किरन का आरोप है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के नाम पर शिक्षकों के लिए अलग से चाय-नाश्ता और भोजन की व्यवस्था करने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि उनके पति लंबे समय से अपने वेतन से यह खर्च उठा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन पर बेहतर व्यवस्था करने का दबाव जारी था। किरन ने आरोप लगाया कि सहायक अध्यापक अभिषेक सिंह ने उनके पति पर एमडीएम का नियंत्रण सौंपने का दबाव बनाया। जब धर्मराज ने लिखित प्रक्रिया की बात कही, तो कथित तौर पर उसे टाल दिया गया। आरोप है कि मना करने पर उन्हें झूठे छेड़छाड़ के मामले में फंसाने, निलंबन कराने और वेतन रुकवाने की धमकी दी गई। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति को एक बार कमरे में बंद कर डराया-धमकाया गया। साथ ही अनुसूचित जाति से होने के कारण उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और अपमानजनक व्यवहार किया गया। किरन के अनुसार, आरोपित शिक्षक विद्यालय में कम उपस्थित रहते हैं और उनके हस्ताक्षर अन्य लोगों से करवाए जाते हैं। इसके अलावा दिव्यांग शौचालय निर्माण के लिए आई धनराशि में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है।

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