जिह्वा में त्रिशूल भेदन कर शक्ति साधना का अद्भुत दृश्य

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दुद्धी, सोनभद्र। आस्था, विश्वास और शक्ति उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि दुद्धी क्षेत्र में पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। एकम के जईया पूजन से लेकर राम नवमी तक भक्तों का जनसैलाब माता की भक्ति में लीन नजर आया। नौ दिनों तक व्रत, हवन-पूजन, ढोल-मंजीरे और देवी स्तुति के बीच पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। नवमी के दिन आस्था का अद्भुत और हैरतअंगेज दृश्य देखने को मिला, जब शक्ति उपासकों ने अपनी जिह्वा और गालों में त्रिशूल का भेदन कर कठोर साधना का प्रदर्शन किया। हाथों में अग्नि से भरे पात्र और सिर पर नौ दिनों में उगाए गए जौ (जईया) को धारण कर भक्त मंदिरों में पहुंचे और माता के चरणों में नतमस्तक हुए। जहां सामान्यतः एक सुई की चुभन से शरीर सिहर उठता है, वहीं भक्तों द्वारा लोहे के त्रिशूल से जिह्वा भेदन करना आस्था और साधना की पराकाष्ठा को दर्शाता है। इस दृश्य को देखकर श्रद्धालुओं का रोम-रोम पुलकित हो उठा। मंदिरों में भक्तों ने एक-दूसरे के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और माता-बहनों को आंचल में जौ भेंट किए। कई स्थानों पर देवी उपासकों के सिर पर घी रखकर शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया गया। ढोल-नगाड़ों और शंख-घंटों की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जा से भर गया। सुबह होते ही काली मैया की जय, बजरंगबली की जय और दुर्गा माता की जय के जयघोष से पूरा नगर गूंज उठा। मंदिरों में भेदन किए गए त्रिशूल को सावधानीपूर्वक निकाला गया और घाव वाले स्थान पर सिंदूर व नींबू का प्रयोग कर धार्मिक विधि पूरी की गई। इस अद्भुत दृश्य ने न केवल श्रद्धालुओं को अचंभित किया, बल्कि सनातन परंपरा की जीवंतता और आस्था की गहराई को भी प्रदर्शित किया।

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