सोनभद्र। तमाम शिकायतों और विभिन्न समाचार पत्रों में लगातार प्रकाशित खबरों के बावजूद ओबरा तहसील अंतर्गत जुगैल थाना क्षेत्र के सोन नदी ग्राम भगवा 15 च खण्ड-2 में लीज के आड में अवैध खनन का काला कारोबार रूकने के बजाए दिन-प्रतिदिन अमरबेर की तरह तेजी से तेजी पनफ रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि जिला प्रशासन की सख्ती के बावजूद एनजीटी के सख्त निर्देशों व वन विभाग द्वारा नियमानुसार बालू खनन के लिए जारी की गई एनओसी का में दर्ज आदेशों को ताक पर रखकर सोन नदी के बीचो-बीच स्थित हाई टेंशन टावर के नीचे बेखौफ होकर प्रतिबंधित मशीनों के जरिए बालू की निकासी दिन-रात करायी जा रही है। बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही खनिज विभाग के जिम्मेदार अफसर व स्थानीय पुलिस मूकदर्शन बनी हुई है।भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि चोपन सोन नदी ग्राम भगवा के अराजी नंबर 15 च में मे. रूद्र माइनिंग एण्ड कम्पनी के घोरावल क्षेत्र निवासी प्रो. भूपेन्द्र प्रताप सिंह के नाम से 12.146 हेक्टेयर में बालू खनन के लिए लीज आवंटित है। पट्टाधारक की ऊंची पहुंच के कारण इस बालू खनन क्षेत्र में सारे नियम-कानून दम तोड़ रहे हैं। रात्रि के अंधेरे में प्रतिबंधित मशीनें बेखौफ गरज रही हैं। नदी की बीच धारा में प्रतिबंधित मशीनों का खुलेआम इस्तेमाल कर हाईटेंशन टावर के नीचे तक खनन कराया जा रहा है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है, इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है, जिससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में सीएम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन जेष्ठ खान अधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से लेने के बजाय कथित रूप से गलत और तथ्यविहीन जांच आख्या प्रस्तुत कर शिकायत को ही नजरअंदाज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले में बड़े स्तर पर मिलीभगत सामने आ सकती है।