ईद रोजेदारों के लिए जिसने माह भर नमाजें अदा की और कुरआन की तिलावत की: फरमाने मुस्तफा (स0)

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भदोही। मज़हबे इस्लाम में सब्र और आजमाइश को आला दर्जा दिया गया है। अल्लाह तबारक व तआला अपने नेक बन्दों को वक्त-वक्त पर हर इम्तेहान लेता है और उन्हें आज़माता है। ईद की कहानी भी सब्र और आज़माइश का ही हिस्सा है। यानी माह भर जिसने कामयाबी से रोज़ा रखा, सब्र किया, भूखा रहा, खुदा की इबादत की, वो रमज़ान के इम्तेहान में पास हो गया और उसे अल्लाह ने ईद कि खुशी अता फरमायी। ईद की खुशी और इसकी अहमियत और हदीसे पाक की रौशन में बयान करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी अंसार अख्तर अंसारी ने कहा कि ईद उसकी है जो सब्र करना जानता हो, जिसने रमज़ान को इबादतों में गुज़ारा हो, जो बुरी संगत से पूरे महीने बचता रहा हो, मगर उस शख्स को ईद मनाने का कोई हक़ नहीं है जिसने पूरे महीने रोज़ा नहीं रखा और न ही इबादत की। श्री अंसारी ने कहा कालन नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम यानी आका-ए-दोआलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया कि रमज़ान वो मुकदद्स महीना है जो लोगों को यह दर्स देता है कि जैसे तुमने एक महीना अल्लाह के लिए वक्फ कर दिया, सुन्नतों और नफ़्ल पर गौर किया, उस पर अमल करता रहा, वैसे ही बचे पूरे साल नेकी और पाकीज़गी जारी रखो। यह महीना इस बात की ओर भी इशारा करता है कि अगर एक महीने की इबादत के बाद ईद की खुशी बंदों को अल्लाह देता है तो 12 महीने अगर इबादतों में गुज़ारा जाये तो जिन्दगी में हर दिन ईद जैसा और हर रात रमज़ान जैसी होगी। ईद उसके लिए है जिसने पूरे महीने रोजा रखा, नमाजें अदा की और तिलावते कुरआने पाक की। श्री अंसारी ने कहा कि रमज़ान महीने की इबादत इसलिए भी महबूब है क्यों कि ये अल्लाह का महीना है और इस महीने के पूरा होते ही मेरा परवरदिगार अपने नेक रोजेदार बन्दों को ईद का तोहफा देकर यह बताता है कि ईद की खुशी तो सिर्फ दुनिया के लिए है। इससे बड़ा तोहफा कामयाब रोज़ेदारों को आखिरत में जन्नत के रूप में मिलेगा। कहा पूरी दुनिया में यह अकेला ऐसा त्योहार है जिसमें कोई भी पुराने या गंदे कपड़ों में नज़र नहीं आता। अगर एक महीने की इबादत के बाद ईद मिलती है तो हम साल के बारह महीने इबादत करें तो हमारा हर दिन ईद होगा। तो हम क्यों न हर दिन हर महीना अपना इबादत में गुज़ारे। ऐ मेरे पालनहार ऐ मेरे अल्लाह तू रमजान के सदके में हमें पूरा साल नमाजी बना दे, हमें नेक और हमारे दिलों को मोहब्बतों से भर दे। आमीन

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