लखनऊ: सीएसजेएमयू पत्रकारिता विभाग के सहयोग से भारतीय महाविद्यालय, फर्रूखाबाद में दो दिवसीय (17-18 मार्च) अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार की विधिवत शुरुआत हुई । प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भारतीय महाविद्यालय के प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार त्रिपाठी ने किया । उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का ध्येय शैक्षणिक मंथन द्वारा राष्ट्रीय विमर्श स्थापित करना होता है, और यह संगोष्ठी दो दिनों में निश्चित ही साहित्य और फिल्म जैसे विषयों के लिए एक नया आयाम तैयार करेगा।मुख्य अतिथि के तौर पर महाविद्यालय विकास परिषद्, सीएसजेएमयू, के निदेशक प्रोफेसर राजेश कुमार द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस डिजिटल युग में मीडिया की निष्पक्षता और साहित्य की गहराई राष्ट्र पुनरुत्थान में आवश्यक है । उन्होंने मीडिया को केंद्र बिंदु मानकर साहित्य और फिल्म के क्षेत्र नया राष्ट्रीय चेतना जागृत करने की बात कही ।read more :https://khabarentertainment.in/holi-milan-celebration-was-organised-under-the-joint-leadership-of-all-india-vishwakarma-youth-brigade/ मुख्य वक्ता के तौर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रवींद्र प्रताप सिंह ने कहा कि साहित्य वह मशाल है जो राष्ट्र के अतीत, वर्तमान और भविष्य को आलोकित करती है। जब हम किसी राष्ट्र की पहचान की बात करते हैं, तो वह केवल उसके मानचित्र या सीमाओं से तय नहीं होती, बल्कि वहां के विचारों, मूल्यों और संस्कृति से होती है, जिसे साहित्य ही जीवंत रखता है। विशिष्ट वक्ता के तौर पर वीएसएसडी कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर नीरू टंडन ने संगोष्ठी की महत्ता पर प्रकाश डाला एवं फिल्म और मीडिया के माध्यम से कैसे संस्कृति का संरक्षण किया जा सकता है इस पर विस्तार से चर्चा किया।सेमिनार में अतिथि वक्ता के तौर पर एएनडीएनएनएम महाविद्यालय, कानपुर के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर जावा कुसुम सिंह ने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज का एक शक्तिशाली दर्पण भी है। फिल्में समाज से प्रभावित होती हैं और समाज को गहराई से प्रभावित करने की क्षमता भी रखती हैं।संगोष्ठी के संयोजक डॉ निधीश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, भारतीय महाविद्यालय, फर्रूखाबाद ने कहा कि इस दो दिनों में देश विदेश के ख्यातिलब्ध विद्वानों, शोधार्थियों के शोधपत्रों की प्रस्तुति की जायेगी साथ ही फिल्म, साहित्य और मीडिया के आयामों पर विचार विमर्श किया जायेगा। इस सेमिनार में कला, साहित्य, पत्रकारिता और सिनेमा के क्षेत्र में रूचि रखने वालों की सहभागिता हो रही है ।सेमिनार के सह संयोजक के तौर पर डॉ दिवाकर अवस्थी, अध्यक्ष, पत्रकारिता विभाग, सीएसजेएमयू, कानपुर ने कहा कि- “साहित्य, चलचित्र और पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्र की पहचान का पुनरुत्थान” विषय पर आधारित इस सेमिनार का आयोजन भारतीय महाविद्यालय, फर्रूखाबाद और सीएसजेएमयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस सेमिनार में आज से विभिन्न सत्रों में नॉर्वे, मॉरीशस, श्रीलंका और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वान अपने शोधपरक व्याख्यान देंगे । इस सेमिनार में आज और कल ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से कई अंतरराष्ट्रीय विद्वान शामिल होंगे।